रांची, 26 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को आदिवासियों की जमीन के अवैध हस्तांतरण और ट्राइबल सब प्लान (टीएसपी) फंड के कथित विचलन का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा।
विपक्षी और सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने आदिवासी हितों से जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब तलब किया। कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि राज्य में जमीन का अवैध हस्तांतरण लगातार जारी है, जिससे आदिवासी समुदाय की जनसंख्या अनुपात पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इसका प्रभाव राजनीतिक, भाषाई और सांस्कृतिक संरचना पर भी दिखाई दे रहा है। रांची कभी अनुसूचित क्षेत्र था, लेकिन अब अनारक्षित हो चुका है। उन्होंने बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण को भी गंभीर समस्या बताया।
राजस्व मंत्री दीपक बिरूआ ने जवाब में कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। यदि किसी मामले में गलत तरीके से जमीन का हस्तांतरण हुआ है तो उसकी वापसी की कार्रवाई की जाती है। अवैध नक्शा पास कराने के मामलों की जांच कराई जाएगी।
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अवैध हस्तांतरण और जमीन वापसी का समग्र आंकड़ा फिलहाल सरकार के पास उपलब्ध नहीं है और इसकी रिपोर्ट मंगाई जाएगी।
मंत्री सुदिव्य सोनू ने भी कहा कि कानून अपना काम करेगा और अवैध हस्तांतरण के मामलों में कार्रवाई होगी। खिजरी के कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने टीएसपी फंड के विचलन का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि ऐसे मामलों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है।
इस पर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र से टीएसपी फंड आबादी के अनुपात में प्राप्त होता है। उन्होंने माना कि राज्य में टीएसपी फंड के उपयोग को लेकर अब तक स्पष्ट गाइडलाइन नहीं बनी है। इस दिशा में ठोस दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने अन्य राज्यों की गाइडलाइन का अध्ययन कर राज्य में नीति बनाने का सुझाव दिया।

