अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा नेपाल का पर्यटन, राजनीतिक दलों ने आगे आकर संभाली कमान

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नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में पर्यटकों की घटती संख्‍या एक बड़ी च‍िंता का व‍िषय बनी हुई है। जो देश कभी वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय पर्यटन स्थल हुआ करता था, वह कोरोना काल के बाद से पर्यटन के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। इसको लेकर वहां राजनीत‍िक पार्टियों ने पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करने का बीड़ा उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में पांच मार्च को संसदीय चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव में हिस्सा ले रही बड़ी पॉलिटिकल पार्टियों की ओर से पर्यटन को लेकर च‍िंता जताई जा रही है और इसमें सुधार के लिए प्रयास करने का वादा क‍िया जा रहा है।

द काठमांडू पोस्ट ने गुरुवार को बताया, “पिछले तीन सालों से नेपाल में हर साल सिर्फ एक मिलियन से ज्‍यादा टूरिस्ट आ रहे हैं, और टूरिस्टों का आना अभी भी 2019 के कोविड से पहले के लेवल पर नहीं पहुंचा है। इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स ने बार-बार होने वाले प्लेन क्रैश, खराब हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर और कमजोर इंटरनेशनल प्रमोशन को मुख्य रुकावटें बताया है।”

रिपोर्ट में कहा गया कि चार प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पर्यटन को केंद्र में रखा है। उन्होंने विमानन सुरक्षा में व्यापक सुधार, भारत के साथ अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्ग सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास और पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या और उनके खर्च को दोगुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का वादा किया है।

सभी दलों के वादों में एक समान बात यह है कि वे नेपाल को यूरोपीय आयोग की एयर सेफ्टी सूची से हटाने और देश के दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल ने पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने के लिए पर्यटन अवसंरचना विकास, बाजार प्रचार, हवाई सेवाओं के विस्तार, आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और नए पर्यटन स्थलों को खोलने को प्राथमिकता दी है। साथ ही ‘पर्यटक सुरक्षा पहले’ पर जोर दिया गया है।

ओली से पहले के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की लीडरशिप वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने नेपाल एयरलाइंस और प्राइवेट कैरियर्स दोनों में टेक्निकल सुधारों के साथ-साथ यूरोपियन कमीशन की एयर सेफ्टी लिस्ट से हटाने के लिए कानूनी कदम उठाने का वादा किया है, जबकि नेपाली कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में वेलनेस और स्पिरिचुअल टूरिज्म को आगे रखा है।

नई बनी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अगले पांच सालों में टूरिस्ट की संख्या और उनके एवरेज खर्च को दोगुना करने का वादा किया है। साथ ही टेक्निकल और पॉलिसी सुधारों का प्रस्ताव भी दिया है।

पिछली रिपोर्ट्स में नेपाल टूरिज्म बोर्ड के जनवरी में जारी किए गए डेटा का हवाला दिया गया था, जिससे पता चलता है कि देश में पिछले साल कोविड से पहले के टूरिस्ट आने की संख्या की तुलना में 97 प्रत‍िशत की रिकवरी हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच हवाई मार्ग से 11,58,459 पर्यटक दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 11,47,548 थी।

इनमें 2025 में हवाई मार्ग से नेपाल आने वाले 2,92,438 भारतीय पर्यटक शामिल थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत कम थे।

बता दें कि 2019 में महामारी से पहले नेपाल में हवाई मार्ग से कुल 11,97,191 पर्यटक आए थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के एक अलग बयान के अनुसार, भारतीय पर्यटक प्रमुख त्योहारों और आयोजनों के दौरान विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय आगमन में अग्रणी बने हुए हैं।

भारत नेपाल का सबसे बड़ा स्रोत बाजार बना हुआ है, जो कुल अंतरराष्ट्रीय आगमन का 25 से 30 प्रतिशत योगदान देता है। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 में जनवरी 2025 की तुलना में भारतीय पर्यटकों के आगमन में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती रुचि और यात्रा विश्वास की वापसी को दर्शाता है।

इससे पहले की रिपोर्ट्स में नेपाल टूरिज्म बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दीपक राज जोशी के हवाले से जनवरी में कहा गया था कि भारतीय पर्यटकों में कमी का कारण पिछले साल सितंबर में जेन-जी का विरोध प्रदर्शन था, जिसने केपी ओली की सरकार गिरा दी थी, जिसके नतीजे में 77 लोगों की मौत हो गई थी।

हालांकि, उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में मीडिया से कहा कि राजनीतिक अशांति के बावजूद 2025 में कुल पर्यटक आगमन अच्छा रहा, क्योंकि देश में हवाई मार्ग से वैश्विक पर्यटक आगमन में एक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

उन्होंने दोहराया कि भारत नेपाल के लिए विदेशी पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है और 2025 में कुल आगमन में भारतीय पर्यटकों की हिस्सेदारी 35.2 प्रतिशत रही, जो विश्व में सबसे अधिक है।

भारत के बाद पिछले वर्ष नेपाल के पर्यटन में योगदान देने वाले शीर्ष पांच देशों में अमेरिका (1,12,316), चीन (58,684), यूनाइटेड किंगडम (57,545) और बांग्लादेश (49,357) शामिल रहे।