अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हमलों का बलूच नेता ने किया विरोध, काबुल के लिए समर्थन दोहराया

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लंदन, 27 फरवरी (आईएएनएस)। बलूच आजादी के समर्थक हिर्बेयर मर्री ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की ओर से हुए हमले का विरोध किया है। शुक्रवार को एक बयान जारी कर जवाबी कार्रवाई की आलोचना की।

उन्होंने बलूच और पश्तून लोगों की कथित न्यायेत्तर हत्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए हमले की निंदा की और दावा किया कि बलूच समुदाय हमेशा से ही अफगानिस्तान के साथ खड़ा है।

अफगान नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री ने शुक्रवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर जवाबी हमले को स्वीकार करते हुए दावा किया था कि उन्होंने करीब 55 पाकिस्तानी सैनिक मार गिराए और 19 पोस्ट के साथ दो बेस पर कब्जा जमा लिया है।

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई हुई। मर्री ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब काबुल उनके एयरस्ट्राइक का जवाब देता है तो उनसे कहा जाता है कि “कैसे मुसलमान हैं” जो रमजान के पवित्र महीने में साथी मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं।

मर्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान रमजान के पांचवें दिन, 22 फरवरी को अफगानिस्तान के अंदर हमले करने के अपने ही कामों को भूल गया है।

बलूच नेता ने दावा किया कि कुछ पाकिस्तानी जानकार और नेता अफगानों के धर्म पर सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि वे मुसलमान भी नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे एक पुरानी बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लोगों को किसने इस्लाम कबूल कराया।

मर्री ने एक्स पोस्ट में कई मुद्दे उठाए। एक सवाल के साथ पूछा, “पंजाब, वह जमीन जिसने पिछले आठ सौ सालों में हर हमलावर की सेवा की है, फूलों से उनका स्वागत किया है और हमलावरों को महाद्वीप और दक्षिण मध्य एशिया के देशों को जीतने में मदद करने में अहम भूमिका निभाई है। अब वे इस्लाम के रक्षक होने का दावा करते हैं, लेकिन उसी पवित्र पाकिस्तानी-पंजाबी सेना द्वारा हजारों बलूच और पश्तून लोगों की बिना कानूनी कार्रवाई के हत्याओं का क्या?”

बलूच नेता ने इस बात पर जोर दिया कि अफगान विदेश मंत्री के भारत के आधिकारिक दौरे के बाद, पाकिस्तान इतना तिलमिलाया कि उसने काबुल को भारत का प्रॉक्सी तक बता दिया।

उन्होंने कहा, “यह एक छोटा सा दौरा भी पाकिस्तानी संभ्रांतों को पच नहीं रहा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि अफगानिस्तान उनका बैकयार्ड है और अफगान लोगों के लिए फैसले लेने का पूरा हक उन्हीं का है। लेकिन रियलिटी चेक जान लीजिए: अफगानिस्तान एक आजाद देश है और वह अपनी पसंद के किसी भी देश के साथ रिश्ते रख सकता है।”

मर्री ने आरोप लगाया कि “पाकिस्तान पिछले आठ दशकों से भीख का कटोरा लेकर पूरी दुनिया में घूम रहा है और अपने विदेशी आकाओं के हितों की सेवा कर रहा है, जबकि अभी भी मुस्लिम दुनिया का एकमात्र रक्षक और किसी का प्रॉक्सी होने का दावा कर रहा है। यह टिप्पणी एक देश की ओर से आ रही है जो दुनिया भर में कुख्यात इंटरनेशनल भिखारी है।”

अफगानिस्तान के साथ एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि हम सदियों से दोस्त रहे हैं और एक-दूसरे का बचाव करते रहे हैं। कुछ भी नहीं बदला है। हम अफगानियों के खिलाफ पाकिस्तानी हमले की निंदा करते हैं।”