नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। परगट सिंह की गिनती भारतीय हॉकी टीम के दिग्गज डिफेंडर में होती है, जिन्होंने अपने मजबूत डिफेंस और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई यादगार मुकाबलों में अहम भूमिका निभाई। परगट सिंह ने सिर्फ 6 मिनट में 4 गोल दागकर भारत के लिए मैच बचाने का कारनामा भी किया है।
5 मार्च 1964 को पंजाब के जालंधर में जन्मे परगट सिंह को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद परगट सिंह ने लायलपुर खालसा कॉलेज में दाखिला लिया, जहां शानदार खेल के साथ भारत की जूनियर हॉकी टीम में जगह बनाई।
कुछ समय बाद परगट सिंह ने सीनियर हॉकी टीम में भी जगह बना ली और हांगकांग में खेले गए टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को भारतीय हॉकी टीम के प्रमुख खिलाड़ियों के तौर पर स्थापित किया।
चैंपियंस ट्रॉफी 1985 में परगट सिंह ने यादगार प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंकाया। भारतीय टीम का सामना जर्मनी से था, जिसमें विपक्षी टीम 5-1 से आगे थी। इसके बाद परगट सिंह ने सिर्फ 6 मिनटों में 4 गोल दागकर मुकाबले को 5-5 से ड्रॉ करवाया। इस प्रदर्शन ने परगट सिंह को देश का हीरो बना दिया था।
1986 में हॉलैंड के खिलाफ परगट सिंह ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया, जिसकी बदौलत टीम इंडिया ने 3-2 से जीत दर्ज की। 1992 बार्सिलोना ओलंपिक और 1996 अटलांटा ओलंपिक में परगट सिंह के हाथों में भारतीय हॉकी टीम की कमान थी।
हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए परगट सिंह को साल 1989 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 1998 में उन्हें ‘पद्म श्री’ से नवाजा गया।
हॉकी से संन्यास के बाद परगट सिंह ने राजनैतिक सफर शुरू किया। वह पंजाब के राजनेता बने और सरकार में खेल मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

