नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। रोजाना योगाभ्यास स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में महत्पवूर्ण भूमिका अदा करता है। कई लोग आम योगासन को बारे में तो जानते हैं, लेकिन उत्थित पार्श्वकोणासन के बारे में कम ही जानते हैं। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के शारीरिक लाभ मिल सकते हैं।
‘उत्थित पार्श्वकोणासन’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ विस्तारित ‘पार्श्व कोण मुद्रा’ है। यह खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जो तत्वों को मिलाकर शरीर के साइड भाग को खोलता है।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर के दोनों तरफ में गहरा खिंचाव आता है, जिससे कमर दर्द में राहत मिलती है और रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना 30-60 सेकंड तक इसके अभ्यास से जीवनशैली बेहतर हो सकती है। हालांकि, इसके साथ संतुलित आहार भी लेना चाहिए।
इसको करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले योगा मैट पर दोनों पैरों को एक दूसरे से दूर फैला लें। अब दाहिने पैर के पंजे को बाहर की तरफ घुटने से धीरे-धीरे मोड़ें और उसी मुद्रा में नीचे की ओर बैठें। फिर अपने दाएं हाथ को दाएं पैर के पास जमीन पर रखें और बाएं हाथ को ऊपर की ओर सीधा 90 डिग्री के एंगल में रखने की कोशिश करें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहने की कोशिश करें, फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। हालांकि, शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को इसको करने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो जाएगी और शरीर खुलने लगेगा।
आयुष मंत्रालय ने इसको करने के फायदे पर अहम प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, यह एक खड़ी मुद्रा वाला योगासन है, जो पेट के अंगों की मालिश करता है, पाचन में सुधार लाता है, और पैरों व रीढ़ को मजबूत करता है। इसके अलावा, शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
वहीं, इससे दिमाग को शांति भी मिलती है और मानसिक तनाव से भी दूरी बनी रहती है।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं, लेकिन शुरुआत में इसको किसी योग विशेषज्ञ की निगरानी में ही करें, और अगर आपको कोई गंभीर चोट, माइग्रेन, या हाल ही में कोई सर्जरी हुई है, तो करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें।

