Friday, July 10, 2026
SGSU Advertisement
Home Student & Youth वनमाली कथा सम्मान में रचनाओं की संवेदनात्मक गूंज, युवा कहानी पर हुआ...

वनमाली कथा सम्मान में रचनाओं की संवेदनात्मक गूंज, युवा कहानी पर हुआ गंभीर विमर्श

0
26

भोपाल : 26 फरवरी/ तीन दिवसीय वनमाली कथा सम्मान समारोह के तीसरे दिन प्रथम सत्र में सम्मानित रचनाकारों का ‘रचना पाठ’ आयोजित किया गया। वरिष्ठ कवि कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष चौबे की अध्यक्षता और वरिष्ठ आलोचक महेश दर्पणके सान्निध्य में आयोजित इस सत्र में उर्मिला शिरीष ने माँ और बेटी के रिश्ते को बहुत मार्मिकता से अपनी चर्चित कहानी ‘यात्रा’ के बहुत खुबसूरत पाठ में प्रस्तुत किया।वनमाली युवा कथा सम्मान से सम्मानित युवा कथाकार कुणाल सिंह ने पंजाब की पृष्ठभूमि पर केन्द्रित अपनी कहानी ‘डूब’ का अविस्मरणीय पाठ करते हुए अलगाववाद से उपजे पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों को बहुत ही संजिदगी से उठाया।

इस अवसर पर संतोष चौबे ने कहा की उर्मिला शिरीष और कुणाल सिंह दोनों ही कहानी के सशक्त हस्ताक्षर हैं। दोनों की कहानियों का तापक्रम उनकी रचनाओं की महत्वपूर्ण विशेषता है।

महेश दर्पण ने कहा कुणाल सिंह की कहानी हिंदुस्तानी जबान की तहजीब को बहुत शिद्दत से रेखांकित करती है। उर्मिला शिरीष की कहानी काव्यात्मक भाषा में लिखी गई अपने समय की महत्वपूर्ण कहानी हैं।

इस अवसर पर आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा हाल ही में प्रकाशित ‘दस कहानियाँ उर्मिला शिरीष’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। सत्र का संचालन युवा आलोचक अरुणेश शुक्ल द्वारा किया गया।

वनमाली कथा सम्मान समारोह के तीसरे दिन आयोजित द्वितीय सत्र में “समकालीन युवा कहानी की संवेदनाएं और सामाजिक परिदृश्य” विषय पर विचारोत्तेजक परिचर्चा संपन्न हुई। सत्र में कथाकार गीताश्री, संजय शेफर्ड और कैफी हाशमी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुकेश वर्मा ने की, जबकि शशांक ने सान्निध्य वक्तव्य प्रदान किया। परिचर्चा की शुरुआत करते हुए कैफी हाशमी ने कहानी के बदलते रुझानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के युवा रचनाकार फैंटेसी, प्रतीकों और प्रयोगधर्मी शिल्प के माध्यम से अपनी बात को अधिक रचनात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। संजय शेफर्ड ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नई हिंदी को अक्सर गैर-साहित्यिक प्रवृत्ति के रूप में देखा जाता है, जबकि यह व्यापक सामाजिक वर्गों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध, वर्चुअल व्यापार और समानांतर डिजिटल दुनिया जैसे विषयों ने एक नए यथार्थ को जन्म दिया है, जिस पर गंभीर कथा लेखन की आवश्यकता है। वहीं गीताश्री ने कहा कि युवा कहानी ने स्वयं को पारंपरिक छायाओं से मुक्त करते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान निर्मित की है। आज की युवा कहानी में कथ्य के साथ-साथ कहने का नया सलीका और दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सत्र के समापन पर वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष चौबे ने समाहार वक्तव्य देते हुए कहा कि वनमाली कथा सम्मान हिंदी कहानी के बहुआयामी विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ अंधानुकरण की बजाय मानवीय संवेदनाओं के साथ तकनीक को समझना और उसे साहित्य में रूपांतरित करना समय की आवश्यकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में मुकेश वर्मा ने वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि समकालीनता की अवधारणा हमारी ही निर्मिति है, इसलिए साहित्य को विभाजित दृष्टि से देखने के बजाय समग्र परिप्रेक्ष्य में समझना आवश्यक है। सत्र का संचालन युवा कथाकार कुणाल सिंह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र द्वारा संयोजित और आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित ‘अनुनाद’ और ‘रागमाला’ पुस्तकों का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।

टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने दी फागुनी रंगों से सराबोर गीतों की प्रस्तुतियाँ

इस अवसर पर टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा चेतन्य आठले, विक्रांत भट्ट, चेतन्य आठले के संयोजन में फागुनी रंगों से सराबोर गीतों की सांगीतिक प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।