जेपी नड्डा ने राज्यसभा में विपक्ष पर काम न करने का लगाया आरोप

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नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार को हंगामेदार रही, क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर वॉकआउट कर दिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष पर सदन में काम न करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए उन पर जानबूझकर सार्थक बहस से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग जानकर सदन का माहौल खराब कर रहे हैं, ताकि जनता की समस्या हल न हो सके।

जेपी नड्डा ने कहा, “विपक्ष सदन के अंदर वास्तविक चर्चा नहीं चाहता। चुनावी सुधारों पर विस्तृत बहस पहले ही हो चुकी है, जिसमें सभी सदस्यों को पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद विपक्ष ने एसआईआर मुद्दे को बार-बार उठाना जारी रखा है। मंगलवार को एक बार फिर से विपक्ष बातचीत बंद करके चला गया है और बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।”

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून की कोई इज्जत नहीं। न्यायतंत्र की कोई इज्जत नहीं। सबको धमका रहे हैं। टीएमसी सरकार के अंडर पश्चिम बंगाल अकेला ऐसा राज्य है जहां कानून का राज खत्म हो गया है। टीएमसी को लोकतांत्रिक तरीकों की कोई इज्जत नहीं है। वे लोकतांत्रिक तरीकों में विश्वास नहीं करते और न्यायतंत्र को भी धमकाते हैं।

जेपी नड्डा ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की बेइज्जती की, जो खुद जनजातीय समुदाय से आती हैं। जिस तरह से बंगाल में हो रहा है, वह सही नहीं है। राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इससे बेकार किसी राज्य के लिए कुछ नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ईसीआई द्वारा 2025 के अंत में घोषित एसआईआर में मतदाता विवरणों का गहन सत्यापन शामिल है ताकि यह सुनिश्चित की जा सके कि केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची में रहें और इसमें डुप्लिकेट प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं और गैर-नागरिकों के संभावित समावेशन जैसे मुद्दों का समाधान किया जा सके।

वहीं, विपक्षी दलों ने वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने की संभावना पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से उन राज्यों में जो 2026 के चुनावों की तैयारी कर रहे हैं, उनको परेशानी हो सकती है।