गुवाहाटी, 12 मार्च (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की झारखंड जाकर राजनीतिक चर्चा करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि असम के राजनीतिक मामलों को राज्य के बाहर से निर्देशित नहीं किया जा सकता।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि उन्होंने असम के किसी भी राजनीतिक नेता को राज्य से संबंधित राजनीतिक वार्ता करने के लिए झारखंड जाते हुए कभी नहीं देखा।
मुख्यमंत्री ने गोगोई की झारखंड के नेताओं से मुलाकात की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने असम के किसी भी राजनीतिक नेता को झारखंड जाकर बातचीत करते कभी नहीं देखा। असम की राजनीति दूसरे राज्यों से नहीं चलती।”
सूत्रों के अनुसार, गोगोई गुरुवार शाम को वरिष्ठ कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह के साथ नई दिल्ली से रांची के लिए रवाना हुए।
यह दौरा असम में आगामी राजनीतिक मुकाबले से पहले क्षेत्रीय दलों से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच हुआ है।
कांग्रेस नेताओं ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रमुख हेमंत सोरेन से मुलाकात की और पार्टी से अनुरोध किया कि वे अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय रायजोर दल का समर्थन करने के बजाय असम में कांग्रेस को समर्थन दें।
यह कदम रायजोर दल और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं के बीच बढ़ते संपर्कों की खबरों के बाद उठाया गया है।
6 मार्च को गुवाहाटी में अखिल गोगोई के आवास पर एक गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में झारखंड के दो नेता शामिल हुए: झारखंड के कैबिनेट मंत्री चामरा लिंडा और एक आदिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव विश्वनाथ तिर्की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में रायजोर दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और नवगठित जय भारत पार्टी के बीच असम में संभावित गठबंधन पर चर्चा हुई।
इन अटकलों को और हवा देते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस सप्ताह की शुरुआत में असम का दौरा किया और जय भारत पार्टी की बैठक में भाग लिया।
सरमा ने कहा कि ये घटनाक्रम असम में आगामी चुनावी मुकाबलों से पहले बढ़ती राजनीतिक उठापटक का संकेत देते हैं, और कहा कि अंततः राज्य की जनता ही इसकी राजनीति की दिशा तय करेगी।
इस बीच, गोगोई की रांची यात्रा को कांग्रेस नेतृत्व द्वारा यह सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है कि असम में जेएमएम का समर्थन रायजोर दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के बजाय कांग्रेस को मिले।

