महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र मास की पापमोचिनी एकादशी पर भव्य भस्म आरती

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उज्जैन, 14 मार्च (आईएएनएस)। उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर पर चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (पापमोचिनी एकादशी) के दिन बड़ी संख्या में भक्तों की लंबी कतार देखने मिली। सभी श्रद्धालु बाबा महाकाल का भव्य शृंगार देखने के लिए उत्साहित और उत्सुक दिखाई दिए। मान्यता है कि पापमोचिनी एकादशी पर महाकाल के दर्शन करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर शनिवार तड़के 4 बजे से ही पूरा मंदिर परिसर भक्तों की भारी संख्या से भर गया। वहीं, आरती के दौरान परिसर में मौजूद भक्तों ने ‘जय महाकाल’ के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी।

बाबा की यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा ही करवाई जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है। पंचामृत से उनका पूजन और पवित्र भस्म से विशेष स्नान करवाया गया।

भस्म आरती के बाद बाबा का मनमोहक शृंगार किया गया, जिसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया। यह नजारा देखकर हर किसी का मन प्रसन्न हो गया।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे बहुत खास माना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है। मान्यता है कि दक्षिण दिशा मृत्यु की दिशा है और महाकाल मृत्यु के स्वामी हैं। यहां ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली अलौकिक भस्म आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।