नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। होर्मुज जलडमरूमध्य से दो एलपीजी जहाजों के सुरक्षित गुजरने के बाद अब और भी भारतीय एलपीजी टैंकर इस युद्ध प्रभावित क्षेत्र को पार करने के लिए कतार में हैं। विश्वसनीय सूत्रों ने शनिवार को बताया कि ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है।
सूत्रों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय कुल 28 भारतीय झंडे वाले जहाज संचालित हो रहे हैं, और उनकी सुरक्षा के लिए सभी जहाजों और भारतीय नाविकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं और उन पर 101 भारतीय नाविक सवार हैं।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजीएस) के 12 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, इन जहाजों में लगभग 2.15 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), 4.15 लाख टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और करीब 17.5 लाख टन कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) मौजूद है।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा समुद्री स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, और बदलती परिस्थितियों को देखते हुए निगरानी और तैयारियों को और मजबूत किया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात गुजरता है।
इस बीच दो तेल टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचने वाले हैं। ये दोनों जहाज सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के स्वामित्व में हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ‘शिवालिक’ जहाज को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में लाया जा रहा है और यह अगले दो दिनों में मुंबई या कांडला बंदरगाह पहुंच सकता है। जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है।
वहीं ‘नंदा देवी’ जहाज में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों जहाजों को सुरक्षित रूप से संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से निकालने के लिए भारतीय नौसेना लगातार मार्गदर्शन दे रही है।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद उठाया गया है, जिसमें ऊर्जा और अन्य सामान की आपूर्ति को बनाए रखने पर चर्चा हुई थी।
इससे पहले भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने शुक्रवार को संकेत दिया था कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है, क्योंकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन फिलहाल काफी प्रभावित हो गया है।

