नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 17 रीसाइक्ल्ड पीईटी (आर पीईटी) निर्माण संयंत्रों को अंतिम मंजूरी दे दी है। उद्योग संगठन पीईटी रीसायकलर्स संघ, भारत (एपीआर भारत) ने सोमवार को इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत की पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
एपीआर भारत के अनुसार, सरकार के इस फैसले से हर साल करीब 3 लाख टन फूड-ग्रेड आर पीईटी उत्पादन क्षमता उपलब्ध होगी। इससे 2026-27 तक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग के सरकारी लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
संस्था ने बताया कि इन मंजूरियों के बाद एफएसएसएआई से अधिकृत संयंत्र मिलकर हर साल लगभग 3 लाख मीट्रिक टन आर पीईटी का उत्पादन कर सकेंगे, जिसका उपयोग देश के पेय पदार्थ और बोतलिंग उद्योग में खाद्य-संपर्क पैकेजिंग के लिए किया जाएगा।
एपीआर भारत के महानिदेशक गौतम जैन ने कहा कि यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे (वर्जिन) पीईटी बाजार पर ईरान-इजरायल युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का दबाव है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्कुलर इकोनॉमी के विजन के अनुरूप भी है।
दरअसल, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत 2025-26 से कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग में 30 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इसके बाद हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 2028-29 तक इसे 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योग संगठन के मुताबिक, इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देशभर में 15 से 18 फूड-ग्रेड आर पीईटी रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें करीब 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
इन संयंत्रों में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है और इन्हें यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ईएफएसए) तथा अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के मानकों के अनुरूप स्थापित किया गया है।
वहीं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सितंबर 2021 में आर पीईटी को खाद्य-संपर्क सामग्री के रूप में उपयोग की अनुमति दी थी। इसके बाद जून 2025 में मंत्रालय ने ब्रांड और उत्पादकों को 2025-26 के लिए निर्धारित 30 प्रतिशत आर पीईटी लक्ष्य में कमी होने पर उसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने की छूट भी दी थी।

