कोलकाता, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (सीपीआई-एमएल) आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा के साथ गठबंधन में 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
पार्टी की पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लेफ्ट फ्रंट के साथ चुनाव लड़ने का फैसला राज्य में “भ्रष्ट” अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने और “फासीवादी” भारतीय जनता पार्टी-आरएसएस गठजोड़ को सत्ता में आने से रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
बयान में कहा गया, “हमारा यह फैसला राज्य में वामपंथी ताकतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से भी लिया गया है। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस और सीपीआई(एम) नेतृत्व के साथ कई दौर की बातचीत के बाद हमने इस बार 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे, उनके नाम बाद में घोषित किए जाएंगे।”
सीपीआई-एमएल ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, लेकिन तब उसका लेफ्ट फ्रंट के साथ कोई गठबंधन या सीट बंटवारा नहीं था। उस समय पार्टी नेतृत्व ने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को समान विरोधी मानने के लिए सीपीआई(एम) की आलोचना भी की थी और लोगों से भाजपा के अलावा किसी अन्य राजनीतिक दल को चुनने की अपील की थी।
इधर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट के साथ 2016 से चले आ रहे सीट बंटवारे के समझौते को खत्म कर राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
वहीं लेफ्ट फ्रंट ने सोमवार को 192 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है, जबकि बाकी उम्मीदवारों के नाम बाद में घोषित किए जाएंगे। सीपीआई(एम) नेतृत्व ने अखिल भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के साथ सीट बंटवारे का समझौता जारी रखा है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अगले महीने दो चरणों में होंगे- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को मतगणना की जाएगी।

