महाराष्ट्र सरकार ने एमएसआरटीसी के बस बेड़े को 2037 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा

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मुंबई, 16 मार्च (आईएएनएस) परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सोमवार को विधान परिषद को बताया कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) 2037 तक अपनी 22 हजार बसों के पूरे बेड़े को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल देगा।

उन्होंने कहा कि इस कदम से महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपने सरकारी बस नेटवर्क को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का संकल्प लिया है। सरनाइक ने बताया कि 22 हजार बसों में से अभी लगभग 800 बसें इलेक्ट्रिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह विजन है कि 2047 तक भारत पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (विद्युत-आधारित परिवहन) पर आ जाए।

इसी अभियान के तहत, महाराष्ट्र ने अपना लक्ष्य आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि 2037 तक एमएसआरटीसी का पूरा बेड़ा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हो जाए। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, शुरू में अगले पांच वर्षों तक हर साल 5 हजार डीजल बसें खरीदने की योजना थी, लेकिन अब इस रणनीति में पूरी तरह से बदलाव कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि जिन 8 हजार डीजल बसों पर अभी काम चल रहा है, उनके अलावा भविष्य में बेड़े में शामिल होने वाली सभी बसें इलेक्ट्रिक ही होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि डीजल बसों को ईवी में बदलने के लिए एक योजना भी तैयार की गई है। सरनाइक ने आगे कहा कि चार्जिंग स्टेशनों को रिचार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे बिजली की बचत होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों को चलाने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे पारंपरिक पावर ग्रिड पर निर्भरता कम होगी।

मंत्री ने बताया कि राज्य की ‘ईवी नीति 2026’ के तहत ईवी खरीदने पर कई तरह के आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं, जिनमें टैक्स में छूट और टोल में रियायतें शामिल हैं। अभी, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग और अटल सेतु (एमटीएचएल) जैसे प्रमुख मार्गों पर ईवी को टोल में पूरी तरह से छूट दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन विकसित कर रही है, आर्थिक लाभ प्रदान कर रही है, और चार्जिंग तकनीक के विकास से जुड़े पाठ्यक्रमों को भी बढ़ावा दे रही है।

अभी दिल्ली के पास भारत में इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा बेड़ा है, जिसमें 4,200 से अधिक ईवी शामिल हैं। अपनी ईवी नीति के तहत, दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक उसके इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार होकर 7,500 तक पहुंच जाए और 2028 तक यह संख्या 14 हजार हो जाए।