श्रीदेवी की संपत्ति विवाद में मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, चेंगलपट्टू कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक

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मुंबई, 17 मार्च (आईएएनएस)। दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में मद्रास हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चेंगलपट्टू सिविल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से अब चेंगलपट्टू कोर्ट में मामला आगे नहीं बढ़ सकेगा। मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 26 मार्च की तारीख तय की गई है।

श्रीदेवी ने साल 1988 में चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर संबंदा मुदलियार के परिवार से 4.77 एकड़ जमीन खरीदी थी। पिछले 37 सालों से यह संपत्ति उनके परिवार के कब्जे में रही है। हाल ही में नटराजन और शिवगामी, जो चंद्रशेखरन मुदलियार की दूसरी पत्नी के बेटे और बेटी बताए जाते हैं, उन्होंने खुद को कानूनी वारिस बताकर सर्टिफिकेट हासिल किया और चेंगलपट्टू अतिरिक्त जिला कोर्ट में सिविल मुकदमा दायर कर संपत्ति में अपना हिस्सा मांगा।

इस मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हुए श्रीदेवी के पति बोनी कपूर ने अपनी बेटियों अभिनेत्री जान्हवी कपूर और खुशी कपूर के साथ मिलकर चेंगलपट्टू कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन चेंगलपट्टू कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि मालिकाना हक का फैसला तभी हो सकता है जब पूरा मुकदमा चले। इस आदेश के खिलाफ बोनी कपूर, जान्हवी कपूर और खुशी कपूर ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों दावेदारों ने धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों के आधार पर कानूनी वारिस का सर्टिफिकेट हासिल किया।

उन्होंने बताया कि असली मालिक मायलापुर में रहते थे, लेकिन दावेदारों ने साल 2005 में तांबरम तहसीलदार कार्यालय से झूठे दस्तावेजों के जरिए सर्टिफिकेट बनवा लिया।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि चंद्रशेखरन मुदलियार की पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी का दावा कानूनी रूप से अमान्य है, इसलिए दूसरी पत्नी के बच्चों का वारिस का अधिकार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि चेंगलपट्टू कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करके गलती की है।

मामले की सुनवाई जस्टिस टी.वी. तमिलसेल्वी की बेंच ने की। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 26 मार्च तक स्थगित कर दिया। साथ ही, तब तक चेंगलपट्टू कोर्ट में चल रही सभी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह फैसला श्रीदेवी के परिवार के लिए राहत की बात है, क्योंकि अब चेंगलपट्टू कोर्ट में कोई नया कदम नहीं उठाया जा सकेगा।