नवरात्र के दूसरा दिन बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती, उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

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उज्जैन, 20 मार्च (आईएएनएस)। नवरात्र के दूसरे दिन, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती देखने के लिए भक्तों का सैलाब देखने को मिला।

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को बाबा का अद्भुत शृंगार देखने को मिला, जिसे देखने के लिए भक्त रात से ही कतारबद्ध थे। सुबह 4 बजे की भस्म आरती के दौरान बाबा का विधि-विधान से पूजन किया गया।

सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा को स्नान कर अभिषेक पूजन कराया और भस्म आरती की शुरुआत हुई, जिसे मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के साथ संपन्न किया जाता है।

यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। वे मंत्रोच्चार के साथ बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करते हैं। इस समय शिवलिंग पर भस्म बिखेरी जाती है, जो निराकार रूप का प्रतीक है। इस दौरान बाबा अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

इसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया। इसमें महाकाल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया।

इस दौरान मंदिर परिसर ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। भस्म आरती लगभग दो घंटे तक चलती है। पवित्र भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडों, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़ियों को जलाकर तैयार की जाती है।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती के अलावा दिन भर में छह अन्य आरतियां होती हैं, जिनमें बालभोग, भोग, पूजन, संध्या और शयन आरती शामिल हैं। भस्म आरती का विशेष महत्व है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र है। गर्भगृह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है; वे नंदी हॉल या बैरिकेड्स से दर्शन करती हैं।