नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा है कि इन राज्यों से जवाब मिलने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी।
यह मामला उस समय सामने आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चंबल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इन इलाकों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम भी चल रहा है। लेकिन, खनन की गतिविधियों के कारण घड़ियालों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि संरक्षित वनों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि अगर संरक्षित क्षेत्रों में अवैध खनन जारी रहता है, तो इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी पक्षकार बनाया गया है, ताकि वह मामले की निगरानी और जांच में सहयोग कर सके। अदालत ने यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
फिलहाल कोर्ट ने राज्यों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की गई है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में अवैध खनन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आएंगे।

