रायपुर, 20 मार्च (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक होने वाले पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह प्रतियोगिता रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर में आयोजित होगी, जिसमें देशभर से करीब 3700 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
यह पहली बार है जब इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के आदिवासी खेलों का आयोजन किया जा रहा है। इसे राज्य के लिए गर्व का अवसर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन आदिवासी युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच देगा और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की मेजबानी करना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। युवा हमारे राष्ट्र और राज्य का भविष्य हैं और सरकार उन्हें शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह आयोजन न केवल हमारे आदिवासी एथलीटों की अद्भुत प्रतिभा को प्रदर्शित करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच पर भी पहचान दिलाएगा।”
छत्तीसगढ़ को इस आयोजन की मेजबानी आदिवासी खेल परंपराओं और पिछले सफल आयोजनों, जैसे बस्तर ओलंपिक्स और सरगुजा ओलंपिक्स के कारण मिली है। इन प्रतियोगिताओं में लाखों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह साफ है कि राज्य में खेलों के प्रति लोगों का उत्साह बहुत ज्यादा है। आदिवासी इलाकों के खिलाड़ियों की खास बात उनकी मजबूत शारीरिक क्षमता और अनुशासन है। वरिष्ठ फुटबॉल कोच सरिता कुजूर टोप्पो के अनुसार, आदिवासी खिलाड़ी बहुत अनुशासित होते हैं और उनकी सहनशक्ति भी शहरी खिलाड़ियों से बेहतर होती है। उनके खानपान में बाजरा, सहजन और हरी सब्जियां शामिल होती हैं, जो उन्हें ताकत और ऊर्जा देती हैं।
इस प्रतियोगिता में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी भाग लेंगे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की 23 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी किरण बिस्टा भी शामिल हैं। किरण ने साल 2025 में एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। किरण के साथ कोंडागांव की युवा खिलाड़ी राशि पोयाम, मदवाई पूजा और श्रद्धा प्रधानी भी खेलेंगी, जो खेल को अपना करियर बनाना चाहती हैं।
छत्तीसगढ़ में आधुनिक खेल सुविधाओं ने आदिवासी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे रेजिडेंशियल और डे-बोर्डिंग प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ियों को उन्नत उपकरणों के साथ अच्छी कोचिंग दी जा रही है। इन केंद्रों में खिलाड़ियों के लिए पोषण विशेषज्ञों (डायटीशियन) द्वारा तैयार किया गया संतुलित और पौष्टिक भोजन भी दिया जाता है, जिससे उनकी सेहत और प्रदर्शन बेहतर होता है। यहां आदिवासी छात्र-छात्राओं को तीन साल तक खेलों की ट्रेनिंग लेने की सुविधा मिलती है। खास बात यह है कि वे इस दौरान अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं। इससे वे खेल और शिक्षा दोनों में आगे बढ़ पाते हैं।
रायपुर की तीरंदाजी एकेडमी में करीब 12 सेट ‘रिकर्व और कंपाउंड’ धनुष-बाण उपलब्ध हैं। कोच दुर्गेश नंदिनी के अनुसार, इनका इस्तेमाल ओलंपिक खेलों में किया जाता है और हर एक सेट की कीमत लगभग 4 लाख रुपए है। छत्तीसगढ़ में खेलों का बुनियादी ढांचा भी काफी मजबूत है। पिछले दो साल में राज्य में कई विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की गई हैं। जशपुर में लगभग 4.99 करोड़ रुपए की लागत से सिंथेटिक हॉकी टर्फ बनाया गया है। महासमुंद में करीब 6.60 करोड़ रुपए की लागत से सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक तैयार किया गया है। वहीं, जगदलपुर में लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत से सिंथेटिक टर्फ फुटबॉल मैदान बनाया गया है, जिसमें दौड़ने के लिए ट्रैक भी शामिल है।
छत्तीसगढ़ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक ‘नेशनल ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी करेगा। इस दौरान सात खेलों की प्रतियोगिताएं होंगी, साथ ही कबड्डी और मल्लखंभ को प्रदर्शन खेल के रूप में दिखाया जाएगा। रायपुर में हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और तीरंदाजी की प्रतियोगिताएं होंगी। जगदलपुर में एथलेटिक्स के मुकाबले आयोजित किए जाएंगे, जबकि अंबिकापुर में कुश्ती प्रतियोगिता होगी। प्रदर्शन खेलों में रायपुर में कबड्डी और अंबिकापुर में मल्लखंभ का प्रदर्शन किया जाएगा।

