Sunday, June 14, 2026
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चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन झंडेवाला माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्कंद माता की भक्ति में डूबे श्रद्धालु

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नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन है और सुबह से ही झंडेवाला माता मंदिर में भक्तों का तांता देखने को मिल रहा है। हर कोई मां के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उत्साहित नजर आ रहा है। मंदिर का माहौल बेहद सुंदर और भक्तिमय बना हुआ है। लोग लाइन में लगकर आराम से अपनी बारी का इंतजार कर रहे है और बिना किसी परेशानी के दर्शन कर पा रहे हैं।

मंदिर के पुजारी अंबिका प्रसाद पंत ने बताया कि नवरात्र का यह पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, स्कंदमाता को समर्पित होता है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं और उनका यह रूप ममता, प्रेम और वात्सल्य से भरा हुआ है। खासकर वे महिलाएं जो संतान की इच्छा रखती हैं, वे आज के दिन माता की पूजा-अर्चना करती हैं और माता उन्हें संतान का आशीर्वाद देती हैं।

पुजारी ने यह भी कहा कि पूजा करने के लिए सबसे जरूरी चीज है श्रद्धा। हर व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति और सुविधा के अनुसार पूजा करता है, लेकिन अगर मन में सच्ची भक्ति और विश्वास है, तो माता जरूर प्रसन्न होती हैं। उन्होंने मंत्र भी सुनाया “या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिता…” और बताया कि माता को बाहरी दिखावे से ज्यादा अंदर की भावना प्रिय होती है।

मंदिर में आए एक श्रद्धालु ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां का माहौल बहुत ही अच्छा है। व्यवस्थाएं भी बढ़िया हैं, जिससे लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि लाइन में लगकर आराम से दर्शन हो जा रहे हैं और मंदिर की सजावट भी बहुत आकर्षक है। चारों तरफ भक्ति का माहौल बना हुआ है, जिससे मन को बहुत शांति मिलती है।

वहीं एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि वह बचपन से ही नवरात्र में यहां आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र के हर दिन यहां की सुबह का जो माहौल होता है, वह बहुत ही खास होता है। उनके अनुसार, ये दिन जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आते हैं। ऐसा लगता है जैसे हर नवरात्र के साथ जीवन में एक नया बदलाव आता है, एक नई शुरुआत होती है।

उन्होंने आगे कहा कि मां के दर्शन करने के बाद मन हल्का और खुश हो जाता है। एक अलग ही सुकून मिलता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यही वजह है कि वह हर साल नवरात्र में यहां आना नहीं छोड़ते।