Sunday, August 16, 2026
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अंग्रेजों ने किया भगत सिंह का अंत, उनके विचार लोगों में अब भी जीवित: यादविंदर सिंह संधू

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नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली में शहीद दिवस के अवसर पर सोमवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में महान क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा ने पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए उनके बलिदान को याद किया।

कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह के पोते यादविंदर सिंह संधू भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने भगत सिंह को गुपचुप तरीके से फांसी दी थी। अंग्रेजों को लगा कि इससे भगत सिंह का अंत हो जाएगा लेकिन उनका विचार और बलिदान आज भी जीवित है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह हमेशा अमर रहेंगे और देशवासियों के दिलों में बसे रहेंगे।

यादविंदर सिंह संधू ने दिल्ली सरकार द्वारा शहीदों को सम्मान देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो भगत सिंह और उनके विचारों को करीब से समझना चाहते हैं। उन्होंने इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।

इस मौके पर मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह ने कहा कि शहीदी दिवस देश के वीर सपूतों को याद करने का दिन है। उन्होंने बताया कि विधानसभा का वह गलियारा ऐतिहासिक महत्व रखता है, जहां कभी “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे गूंजते थे और भगत सिंह से जुड़े मामलों की सुनवाई होती थी।

मंत्री ने बताया कि उसी ऐतिहासिक स्थल पर भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिससे खासकर युवाओं को उनके जीवन और संघर्ष के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल का नेतृत्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने किया।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन देशभक्ति और शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक बना है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सभी ने मिलकर क्रांतिकारियों के बलिदान को नमन किया।

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शहीद दिवस के अवसर पर पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित आरसीएस कार्यालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया और परिसर में जीर्णोद्धार किए गए “ऐतिहासिक कोर्ट ट्रायल रूम” का लोकार्पण हुआ।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रतिमा युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए उस क्रांतिकारी चेतना की प्रेरणा है, जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का साहस दिया और मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प जगाया। यही वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां भगत सिंह जी की सुनवाई हुई थी। यह “कोर्ट ट्रायल रूम” एक कमरा भर नहीं बल्कि उस अदम्य साहस, अटूट जज़्बे और प्रखर राष्ट्रभक्ति का सजीव प्रतीक है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। राष्ट्र उनके महान बलिदान के प्रति सदैव ऋणी रहेगा।

इस अवसर पर शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व शहीद भगत सिंह के पोते यादविंदर सिंह संधू, कैबिनेट सहयोगी प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविन्द्र इन्द्राज सिंह, कपिल मिश्रा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।