कमल हासन का बड़ा फैसला: एमएनएम 2026 तमिलनाडु चुनाव में सीधे नहीं लड़ेगी, डीएमके को समर्थन

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चेन्नई, 24 मार्च (आईएएनएस)। मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के संस्थापक और प्रमुख अभिनेता कमल हासन ने मंगलवार को एक प्रेस बयान जारी कर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सीधे तौर पर कोई सीट नहीं लड़ेगी और डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देगी।

कमल हासन ने अपने बयान में कहा, “पिछले संसदीय चुनावों में हमने देश के कल्याण के लिए डीएमके नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया था। हमने गठबंधन की जीत के लिए अथक परिश्रम किया और राज्यसभा में एमएनएम की आवाज सुनी गई। तब से हम अपनी पहचान से समझौता किए बिना गठबंधन के सिद्धांतों को बनाए रख रहे हैं।”

2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे पर दो चरणों में बातचीत हुई। कमल हासन ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और डीएमके नेताओं द्वारा दिखाए गए सम्मान और सौहार्दपूर्ण व्यवहार की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतीपूर्ण माहौल में गठबंधन की जीत सर्वोपरि है, लेकिन एमएनएम को दी गई सीटों की संख्या और ‘उगता सूरज’ चिह्न के तहत चुनाव लड़ने का सुझाव पार्टी के लिए स्वीकार्य नहीं था।

कमल हासन ने जोर देकर कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं और ‘बैटरी टॉर्च’ चुनाव चिह्न के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। यह मात्र एक चिह्न नहीं, बल्कि हमारी पहचान है। मैं नौ वर्षों से मेरे साथ खड़े निस्वार्थ कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा नहीं कर सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों का हनन हो रहा है और ऐसे समय में ‘हमारा हिस्सा क्या है?’ पूछना सही नहीं होगा। यह बलिदान नहीं, बल्कि कर्तव्य है। कमल हासन ने इसे नई राजनीतिक संस्कृति का बीज बताया और कहा कि प्रेमपूर्वक दी गई चीज को सम्मान से अस्वीकार करना भी स्नेह का रूप है।

कमल हासन ने घोषणा की, “हम खुले तौर पर कहते हैं कि मक्कल निधि मय्यम 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सीधे चुनाव नहीं लड़ेगी और डीएमके गठबंधन के उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देगी।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह फैसला उनकी भावनाओं का सम्मान है।

उन्होंने जोर दिया कि तमिलनाडु ही उनका परिवार है और ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’ सरकार के गठन की जरूरत है, जो महात्मा गांधी, पेरियार और डॉ. अंबेडकर के आदर्शों पर आधारित हो।