दमोह, 29 मार्च (आईएएनएस)। ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ का लाभ लेकर कारीगर आत्मनिर्भर हो रहे हैं और नौकरी करने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं। इस कड़ी में मेहरवान सिंह राजपूत का नाम भी आता है, जो छोटे गांव से निकलकर अपनी एक दुकान से परिवार और अपने सपनों को पंख दे रहे हैं।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक साधारण कारीगर रोजाना मजदूरी करके मुश्किल से 400 रुपए कमाते थे। परिवार की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया था। जब उन्होंने ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ का सहारा लिया, तो उनकी तकदीर ही बदल गई। योजना के तहत मिली ट्रेनिंग, ऋण की मदद से उन्होंने अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया। आज वह हर महीने 40 हजार रुपए की कमाई कर रहे हैं और न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि एक युवा को नियमित रोजगार भी दे रहे हैं।
मध्यप्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के रहने वाले मेहरवान सिंह राजपूत छोटे से गांव धनगौर के रहने वाले हैं। वह पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ लेकर अपना छोटा व्यवसाय चला रहे हैं।
आईएएनएस से बातचीत में लाभार्थी ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन किया। सूची में नाम आने के बाद लगातार 3 महीने तक दमोह जाकर मुफ्त का प्रशिक्षण लिया। 1,600 रुपए भी प्रशिक्षण के दौरान मिला। उन्होंने बताया कि एल्युमिनियम और ग्लास वर्क में पहले से ही अनुभव होने के कारण उन्होंने प्रशिक्षण को जल्दी पूरा कर प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। इसके बाद बैंक से 50 हजार रुपए का लोन स्वीकृत हुआ।
उन्होंने बताया कि मेरे लिए ये योजना किसी वरदान से कम नहीं है। मैं कम पढ़ा-लिखा होने की वजह से खुद को कोसता रहता था। लेकिन, केंद्र सरकार की इस योजना ने हमें कुछ करने का हौसला दिया। इस योजना का लाभ मुझे प्राप्त हुआ है, इसलिए मैं दिल से प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करता हूं। उन्होंने हम जैसे कारीगरों के लिए इतनी अच्छी कार्य योजना बनाई, जिसका लाभ हम सीधे तौर पर ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि दुकान का काम बहुत अच्छा चल रहा है, कभी दिनभर मजदूरी कर 400 रुपए कमाते थे, आज अपने व्यवसाय से हर माह 30 से 40 हजार रुपए कमा रहे हैं। दुकान पर एक युवा को भी रोजगार दिया गया है, जिसे हर माह 8 हजार रुपए सैलरी देते हैं।




