बीकानेर, 29 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में बीकानेर जिले में स्थित अभय जैन ग्रंथालय का जिक्र किया। इसके बाद ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में अभय जैन ग्रंथालय का नाम लिया। यह हमारे ग्रंथालय, बीकानेर और राजस्थान के लिए खुशी की बात है। इस ग्रंथालय में लगभग दो लाख पांडुलिपियों का संग्रह है। इन पांडुलिपियों को अगरचंद नाहटा ने अपने पूरे जीवन काल में संग्रहित किया।
ऋषभ नाहटा ने बताया कि उन्होंने तन मन धन से इस लाइब्रेरी को खड़ा किया। यहां पर संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, गुरुमुखी, तेलुगु, तमिल, बंगाली और अन्य विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ उपलब्ध हैं। संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के तहत डिजिटाइजेशन, कंजर्वेशन और कैटलॉगिंग का काम अभी सुचारू रूप से चालू है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान वार्ता मिशन के तहत यहां मेगा सर्वे चल रहा है। उन्होंने कहा कि मैं सबसे यह निवेदन करूंगा कि जिन लोगों के पास पुरानी पांडुलिपियां और ग्रंथ हैं, आप आइए, सर्वे का हिस्सा बनें और आपके पास जो भी ग्रंथ है, उसकी सूचना दीजिए। उस पर सरकार काम करेगी और इसका महत्व आगे तक फैलेगा।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर में हमने ज्ञान भारतम मिशन के साथ एमओयू किया था। इसके तहत हम यहां डिजिटलाइजेशन कर कंजर्वेशन का काम अभी कर रहे हैं। लगभग हम अभी दो लाख से ज्यादा पृष्ठों का डिजिटलाइजेशन कर चुके हैं और लगभग 6600 ग्रंथों का डिजिटलीकरण हो चुका है। यह काम बहुत समय लेता है, क्योंकि ग्रंथों की स्कैनिंग करना, उसका डिजिटलाइजेशन करना, कैटलॉगिंग करना और कंजर्वेशन करना, ये सारे स्टॉक चीजें फॉलो करनी पड़ती हैं।
उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां लगभग 100 से 400 वर्ष तक प्राचीन हैं। लगभग 100 वर्ष पुराना ग्रंथालय है। इसमें बहुत पुरानी पांडुलिपियों का संग्रह हमारे पास है।
पीएम मोदी ने मन की बात में कहा कि आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है तो उसकी फोटो ज्ञान भारतम ऐप पर जरूर साझा करें। हर एंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले, उसकी पुष्टि भी की जा रही है। मुझे इस बात की खुशी है कि अब तक हजारों पांडुलिपी लोगों ने साझा की है। पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने कॉपर प्लेट पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियां शेयर की हैं।




