ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने के मुद्दे पर संसद में हंगामा, विपक्ष बोला-यह फैसला संविधान के खिलाफ

0
8

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। संसद में शून्यकाल के दौरान ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर रखने के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी पर संविधान विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया और विरोध में सदन से वॉकआउट भी किया।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि शून्यकाल में उठाया गया यह सवाल भारत के संविधान और मंडल आयोग की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को मिलने वाले आरक्षण का विरोध कर रही है, जो सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा को कमजोर करता है।

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने कहा कि भाजपा द्वारा ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर रखने का मुद्दा उठाया गया, जिसके बाद पूरा विपक्ष एकजुट हो गया और विरोध स्वरूप सदन से बाहर चला गया। भाजपा के इस रुख से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 पर सीधा हमला बताया। उनका कहना था कि संविधान धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था करता है। भाजपा पर संविधान के मूल सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा को न तो संविधान की बुनियादी समझ है और न ही पिछड़ा वर्ग आयोग की। उन्होंने मंडल आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि ओबीसी सूची में शामिल समुदायों की पहचान उनके पारंपरिक पेशों के आधार पर होती है, न कि धर्म के आधार पर। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि क्या वह देश में सामाजिक तनाव पैदा करना चाहती है।

डीएमके सांसद पी. विल्सन ने भाजपा के बयान को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के लोगों को ओबीसी समुदाय से बाहर रखना अभूतपूर्व है और यह देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग बराबरी के हकदार हैं और ऐसी बयानबाजी समाज में विभाजन पैदा करती है। भाजपा जिस तरह से देश में बांटने का काम कर रही है। इससे कुछ मिलने वाला नहीं है। हम सबको एक साथ मिलकर रहना चाहिए।