नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने अपने ‘आर्टेमिस II’ मिशन के लॉन्च के लिए सभी अंतिम तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह मिशन 1 अप्रैल को कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होने के लिए तैयार है।
नासा के अनुसार, यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री लगभग 10 दिन की यात्रा पर चंद्रमा के चारों ओर जाएंगे।
आर्टेमिस II मिशन खास इसलिए भी है क्योंकि अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर यानी पृथ्वी की निचली कक्षा से परे यात्रा करेंगे।
इस मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। इनके साथ कनाडा की स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
इस मिशन को नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा और इसमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट के लाइफ-सपोर्ट सिस्टम को पहली बार इंसानों के साथ टेस्ट किया जाएगा।
नासा ने बताया कि लॉन्च के दिन मौसम अनुकूल रहने की संभावना है और लगभग 80 प्रतिशत तक परिस्थितियां सही रह सकती हैं, हालांकि बादल और तेज हवाएं कुछ चुनौती पैदा कर सकती हैं।
लॉन्च के बाद यह स्पेसक्राफ्ट पहले पृथ्वी की उच्च कक्षा में यात्रा करेगा और फिर ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ के जरिए चंद्रमा के दूर वाले हिस्से का चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर लौट आएगा। इस प्रक्रिया में वापसी के लिए अतिरिक्त ईंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बना सकते हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था।
आर्टेमिस II मिशन में कई अहम सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा, जिसमें इमरजेंसी प्रक्रियाएं, रेडिएशन से सुरक्षा और लेजर आधारित एडवांस कम्युनिकेशन तकनीक शामिल हैं।
नासा के मुताबिक, यह मिशन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें चंद्रमा पर मानव मिशन और आगे चलकर मंगल ग्रह तक जाने की तैयारी शामिल है।
स्पेस एजेंसी इस मिशन का लाइव प्रसारण और लगातार अपडेट अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगी।
आर्टेमिस कार्यक्रम नासा की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति बनाना और भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन को संभव बनाना है।




