पंजाब में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 200 करोड़ रुपए की टर्नओवर चोरी का रैकेट बेनकाब : मंत्री हरपाल सिंह चीमा

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चंडीगढ़, 30 मार्च (आईएएनएस)। पंजाब के आबकारी और कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को कहा कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 200 करोड़ रुपए की टर्नओवर चोरी का एक बड़ा रैकेट बेनकाब हुआ है।

चीमा ने बताया कि 882 प्रतिष्ठान पहले से ही जांच के दायरे में हैं और अब तक 2.02 करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं। जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और जैसे-जैसे और डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, कुल चोरी की रकम बढ़कर लगभग 500 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

उन्होंने बताया कि मोहाली, जालंधर और लुधियाना जैसे बड़े शहरी केंद्र टर्नओवर छिपाने के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन सेक्टरों में ज्‍यादातर नकद और हाइब्रिड पेमेंट होते हैं, वे ही इस धोखाधड़ी के केंद्र में हैं।

चीमा ने मीडिया को बताया कि होटलों, ढाबों, भोजनालयों, बेकरियों, मिठाई की दुकानों, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं और इसी तरह के अन्य प्रतिष्ठानों को शामिल करते हुए, पूरे राज्य में एक व्यापक और डेटा-आधारित जांच अभियान चलाया गया। इसके जरिए हमने 2025-26 से जुड़े कुल 882 प्रतिष्ठानों की पहचान की है।

उन्होंने कहा, “आगे के विश्लेषण और वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के डाटा को शामिल करने के बाद, चोरी की कुल रकम लगभग 500 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है। अब तक की शुरुआती जांच में 239 मामलों की जांच की गई है, जिसमें लगभग 50 करोड़ रुपए के टर्नओवर को छिपाने का पता चला है।”

उन्होंने कहा, “इस चोरी में पांच प्रतिशत की दर से 2.54 करोड़ रुपए का टैक्स शामिल है। हमारे विभाग ने अब तक 2.02 करोड़ रुपए की वसूली सुनिश्चित कर ली है, और आगे की वसूली की प्रक्रिया अभी भी जारी है।”

चीमा ने कहा, “हमने तीन करदाताओं में 2 करोड़ रुपए से अधिक, छह करदाताओं में 1 करोड़ रुपए से अधिक, 18 करदाताओं में 50 लाख रुपए से अधिक, 26 करदाताओं में 25 लाख रुपए से अधिक और 91 करदाताओं में 5 लाख रुपए से अधिक के कारोबार को छुपाने का पता लगाया है।”

उन्होंने कहा कि आगे के विश्लेषण से पता चला है कि ज्‍यादा कैश और हाइब्रिड-पेमेंट वाले सेगमेंट्स में कम रिपोर्टिंग के व्यवस्थित पैटर्न मौजूद हैं। इस कम रिपोर्टिंग में ढाबों का हिस्सा लगभग 10 करोड़ रुपए है, जिसके बाद छोटे भोजनालय, कॉफी और चाय बार लगभग 8 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर हैं, और पिज्जा तथा फास्ट-फूड आउटलेट्स 6 करोड़ रुपए से ज्यादा के साथ तीसरे स्थान पर हैं।