2.4 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा अमरावती: सीएम चंद्रबाबू नायडू

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अमरावती, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य की राजधानी अमरावती 2047 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने में “ग्रोथ इंजन” की भूमिका निभाएगी।

शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अमरावती के विकास को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि राजधानी से जुड़े सभी प्रमुख प्रोजेक्ट 2028 तक पूरे हो जाएंगे। नायडू ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने 2015 में अमरावती की नींव रखी थी और पिछले साल काम फिर शुरू करवाया, 2029 में प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने के बाद अमरावती का विकास अब “अविराम” है। उन्होंने इसे पांच करोड़ लोगों की “जनता की राजधानी” की जीत बताया।

नायडू ने अपने आधिकारिक आवास पर मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया और कहा कि वाईएसआर कांग्रेस को छोड़कर सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया, जिसका उद्देश्य अमरावती को राज्य की एकमात्र स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा देना है।

उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों के रुख पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश से चुने जाने के बावजूद उन्होंने राज्य के लोगों की भावनाओं का सम्मान नहीं किया।

टीडीपी प्रमुख नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा-राज्यसभा के शीर्ष नेतृत्व समेत सभी दलों के सांसदों का इस विधेयक के समर्थन के लिए आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी ने शुरू से ही “तीन राजधानियों” के नाम पर अमरावती के विकास में बाधा डालने की कोशिश की और अब भी अड़चनें पैदा करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों द्वारा शासित राज्यों को संसद में पारित विधेयकों का सम्मान करना चाहिए। साथ ही उन्होंने वाईएसआरसीपी के इस बयान पर भी हैरानी जताई कि सत्ता में आने पर वे राजधानी बदल सकते हैं।

नायडू ने पिछली सरकार पर राज्य विभाजन के मुद्दे को सही तरीके से नहीं उठाने और पांच साल के कार्यकाल में सरकारी संपत्तियों को गिरवी रखकर राज्य को कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार बनने के बाद वित्तीय चुनौतियों के बावजूद विकास और कल्याण दोनों पर संतुलित ध्यान दिया जा रहा है, जिसके लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम किया जा रहा है।