उज्जैन, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के आयोजित होने वाली पारंपरिक भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विधि-विधान से जलाभिषेक और विशेष शृंगार किया गया।
वैशाख कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के अवसर पर आयोजित इस भस्म आरती में बाबा का दिव्य और मनमोहक स्वरूप देख भक्त भाव-विभोर हो उठे। जयकारों के बीच पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
परंपरा के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले बाबा महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए। भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।
इसके बाद बाबा का शृंगार किया गया। इसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया।
भस्म आरती का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। इसमें अलग-अलग पेड़ों जैसे गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल की लकड़ियों की राख का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान महाकाल निराकार रूप में होते हैं। इसलिए महिलाओं को इस आरती को सीधे देखने की अनुमति नहीं होती, वे घूंघट या ओढ़नी डालकर दर्शन करती हैं।
मंदिर में इस नियम का सख्ती से पालन किया जाता है। माना जाता है कि महाकालेश्वर के दर्शन से भक्तों को शांति, सुख और आशीर्वाद मिलता है, दुख और बीमारी दूर होती है और अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है।

