दमोह, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार बनती नजर आ रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण तेंदूखेड़ा पोस्ट ऑफिस के बाहर देखने को मिला, जहां योजना से लाभान्वित युवा अपनी मोटरसाइकिल पर टूलकिट ले जाते हुए दिखे।
यह दृश्य न सिर्फ सरकारी योजना की सफलता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के बदलते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां करता है। इस योजना का लाभ उठाकर युवा आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अपने रोजगार को बढ़ा रहे हैं।
तेंदूखेड़ा ब्लॉक के सर्रा गांव के रहने वाले दो युवाओं ने अपने सपनों को साकार करने के लिए कठिन रास्ता चुना और आज सफलता की ओर बढ़ रहे हैं।
लाभार्थी युवा सुरेश कुर्मी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि योजना के तहत उन्हें छह दिन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद उनके खाते में 4 हजार रुपए की सहायता राशि आई और फिर 15 हजार रुपए की टूलकिट प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि इस योजना से करीब 25 युवा जुड़े हैं, जिनमें से चार को टूलकिट मिल चुकी है और अन्य के लिए लोन प्रक्रिया जारी है।
वहीं, दूसरे लाभार्थी परमानंद कुर्मी ने बताया कि उनके गांव के 10 से 15 लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया है। उन्होंने भी तमाम कठिनाइयों के बावजूद प्रशिक्षण पूरा किया और अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद सरकार की ओर से मिली टूलकिट में आवश्यक उपकरण शामिल हैं, जिनकी मदद से वे अपने हुनर को रोजगार में बदल सकते हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और हुनरमंद युवाओं को सशक्त बनाना है। आज युवाओं के हाथों में 15 हजार रुपए की टूलकिट है, जो न केवल उनके बेहतर भविष्य की उम्मीद है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

