इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’ में दिखेगी पुराने दौर की बारीकियां

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मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। निर्देशक इम्तियाज अली अपनी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ लेकर आ रहे हैं। यह फिल्म विभाजन के दौर को पृष्ठभूमि में रखकर प्यार, यादों और घर वापसी की कहानी बताती है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरावरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिकाओं में हैं।

निर्देशक ने हाल ही में आईएएनएस के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने हर छोटी-छोटी चीज को सोच-समझकर तैयार किया ताकि दर्शकों को पुराने जमाने का असली माहौल महसूस हो।

इम्तियाज ने बताया कि पंजाब के 1940 के दशक के कपड़ों पर रिसर्च की गई थी। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, “रिसर्च में जो पता चला, वह हमारी उम्मीद से परे था। उस समय लोग आज के मुकाबले कहीं ज्यादा पश्चिमी रंग-ढंग में रंगे हुए थे, क्योंकि पंजाब उस समय पश्चिम का हिस्सा माना जाता था।”

उन्होंने बताया कि जब फिल्म में पुराने समय की बात बताई जा रही थी, तो जीवंत रखने के लिए हमने रोशनी का अपना एक खास रंग दिया। उन्होंने कहा, “यादों की रोशनी का अपना एक खास रंग होता है। हमने उसी रंग का इस्तेमाल किया। शर्ट के रंग भी उसी हिसाब से चुने गए। उस दौर में हर तरह के डाई उपलब्ध नहीं थे। हमने रिसर्च की और पता लगाया कि उस समय कौन-कौन से रंग उपलब्ध थे। फिर ऐसे कपड़े चुने जो बिल्कुल असली लगें।”

उन्होंने आगे कहा, “जब हम अपनी पुरानी यादों को याद करते हैं तो हमें एक खास नजरिया दिखाई देता है। हमने लेंस और फिल्टर की मदद से ठीक वैसा ही नजरिया बनाने की कोशिश की। हमने कुछ खास फिल्टर भी खुद तैयार किए। कभी-कभी अतीत की चीजों को आज के समय में लाकर बूढ़े आदमी के अनुभव दिखाने की कोशिश की।”

उन्होंने फिल्म में ए.आर. रहमान के साथ काम करने पर कहा, “उस दौर में पंजाब का संगीत या भारत का संगीत एक खास तरह का था। स्विंग और डांस बहुत लोकप्रिय थे। पश्चिमी संगीत की कई शैलियां चलन में थीं। ये सब लोक संगीत के साथ सहजता से घुल-मिल जाती थीं। हमने एक ही गाने में ऐसे प्रयोग किए ताकि संगीत के जरिए उस खास दौर को फिर से जीवंत किया जा सके। इससे दर्शकों को लगेगा कि वे खुद उसी समय में जी रहे हैं और उस रोमांस को अपनी आंखों से देख रहे हैं। इसलिए मैंने रहमान सर को चुना क्योंकि वे उस समय के संगीत की शैली को असली रूप में दिखा सकते थे। साथ ही आज के समय के लिए इसे मनोरंजक और प्रासंगिक बना सकते थे।”

इम्तियाज ने बात को खत्म करते हुए अपनी फिल्मों नें इस्तेमाल होने वाली भाषा पर बात की। उन्होंने बताया, “हमारी फिल्मों में भाषा सटीक होती है। मैंने भारत और पंजाब के कई लेखकों को पढ़ा है, जिन्होंने मेरी कहानी कहने की शैली और जीवन के प्रति नजरिए को आकार दिया।”