मुंबई, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और बहुमुखी पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके जाने से संगीत की दुनिया ने एक ऐसा सितारा खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। लगभग आठ दशकों तक फैले अपने अद्वितीय करियर में आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाज और विविधता से भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आशा भोसले के निधन पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने दुख जताते हुए कहा, “आशा भोसले भारत की सबसे कुशल और बहुमुखी पार्श्व गायिकाओं में से एक थीं। उनकी सुरीली आवाज, संगीत की विभिन्न शैलियों में गाने की उनकी क्षमता, और भारतीय संगीत में उनके विशाल और विविध योगदान ने भारत व दुनिया भर के संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों पर एक अमिट छाप छोड़ी है।”
उन्होंने कहा कि आठ दशकों तक फैले अपने करियर में उन्होंने विभिन्न भाषाओं और शैलियों में अनगिनत अविस्मरणीय गीतों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने को समृद्ध किया। उनकी कलात्मकता, जुनून और अभिव्यक्ति की क्षमता संगीतकारों और संगीत प्रेमियों को प्रेरित करती रहेगी। उनका प्रसिद्ध गीत ‘जो भी है, बस यही एक पल है’ उनके जीवन का फलसफा बन गया था।
राज्यपाल ने कहा कि आशा का निधन संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है और विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य के लिए है। आरडी बर्मन से विवाह के कारण आशा का हमारे परिवार के साथ गहरा जुड़ाव था। महाराष्ट्र की जनता की ओर से और अपनी ओर से मैं दिवंगत आशा भोसले को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोक संतप्त परिवार, प्रशंसकों और पूरे संगीत जगत के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पद्म विभूषण और महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित वयोवृद्ध गायिका आशाताई भोसले के निधन की खबर बेहद हृदयविदारक है। उन्होंने अभी तीन साल पहले ही अपना 90वां जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया था। उनके निधन के साथ ही लता दीदी के बाद मंगेशकर परिवार का एक और सितारा टूट गया है। सुरों का वह खूबसूरत चमन आज वीरान हो गया है।”
सीएम ने आगे लिखा कि आशाताई की आवाज संगीत की आत्मा थी। गायन के क्षेत्र में आशाताई एक शाश्वत वसंत थीं और मधुर भावनाओं का एक विशाल सागर थीं। ‘तोरा मन दर्पण कहलाए’ जैसे रूह को छू लेने वाले गीतों से लेकर ‘खल्लास’ जैसे गानों तक, उन्होंने अनगिनत भावों वाले गीत बड़ी सहजता से गाए। उन्होंने भक्ति गीत, भावपूर्ण धुनें, नाट्य संगीत, गजल, शास्त्रीय संगीत, रवींद्र संगीत, लोकगीत और पॉप जैसे विभिन्न शैलियों पर अपनी एक अनोखी छाप छोड़ी। मराठी, हिंदी, बंगाली के साथ-साथ 20 अन्य भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत गाने वाली आशाताई को ‘महाराष्ट्र भूषण’ की तर्ज पर ‘बांग्ला विभूषण’ जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कहा कि ऐसी बहुमुखी प्रतिभा की धनी गायिका जिन्होंने बदलाव को इतनी सहजता से अपनाया, अब दोबारा नहीं आएंगी। अभी हाल ही में, ‘विश्व रेडियो दिवस’ के एक कार्यक्रम में जब हम साथ थे, तो उन्होंने मुझसे जिद करके अपने लिए ‘अभी न जाओ छोड़कर…’ गीत गवाया था और मज़ाकिया अंदाज में कहा भी था, “देखो, मैंने मुख्यमंत्री से अपने लिए गाना गवा लिया।” यह विचार ही असहनीय है कि अब हमें आशा ताई का साथ नहीं मिलेगा। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। हम उनके परिवार और देशभर में फैले उनके असंख्य प्रशंसकों के दुख में उनके साथ हैं।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “‘संगीत की साम्राज्ञी’ आशा भोसले के दुखद निधन के साथ, वह दिव्य आवाज जो पिछली चार पीढ़ियों के दिलों को संगीत के रंग में सराबोर करती रही और जिसने अनगिनत आत्माओं को सपनों की एक सुनहरी यात्रा पर ले जाकर आनंदित किया, आज हमेशा के लिए खामोश हो गई है।”
उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में एक भी दिन ऐसा नहीं बीता जब आशा ताई की आवाज़ हमारे कानों में न गूंजी हो; ऐसा कोई दिन कभी आया ही नहीं। इस आवाज़ ने अनगिनत पलों को महकाया है, और जीवन के उन अनगिनत पलों को भी हँसी से भर दिया है जो उम्मीदों के रंग में रंगे हुए थे। यह स्वीकार कर पाना बेहद कठिन है कि आशा ताई अब शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ का साथ हमेशा हमारे साथ रहेगा, क्योंकि उनकी आवाज़ की गूंज कालजयी है। मुझे आशा ताई से कई बार मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और वे अविस्मरणीय पल मेरे हृदय में सदैव अमर रहेंगे। आशा ताई की आत्मा को शाश्वत शांति प्राप्त हो, प्रभु के चरणों में मेरी यही प्रार्थना है। संपूर्ण शिवसेना परिवार उनके परिजनों और प्रशंसकों के दुख में उनके साथ है।
शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आशा भोसले के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा, “आशा भोसले के निधन की खबर सुनकर अत्यंत व्यथित हूं। भारतीय संगीत जगत की एक अमर आवाज आज खामोश हो गई। उनकी आवाज ने कई पीढ़ियों को आनंद दिया, दिलों को छुआ। वह एक अत्यंत दयालु व्यक्तित्व की थीं, लता दीदी के बाद संगीत जगत में एक महान युग की स्तंभ की तरह खड़ी रहीं। भारतीय संगीत जगत का यह स्तंभ अब विलीन हो गया है। उनके गीत उनकी अमरता बने रहेंगे। उनकी स्मृति को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
राज्यसभा सांसद प्रफुल पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ” पद्म विभूषण आशाताई भोसले के निधन के साथ ही, आज संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। आशा ताई केवल एक नाम नहीं थीं, बल्कि वे एक अदम्य उत्साह और सुरों की एक अविरल धारा थीं। चाहे शास्त्रीय संगीत हो, भावगीत, लावणी या फिर पाश्चात्य शैली का ‘पॉप’ संगीत आशा ताई ने हर सुर में जान फूँक दी। संगीत के प्रति उनका अटूट समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। ईश्वर आशा ताई की आत्मा को चिर शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस अपार दुख से उबरने की शक्ति दें, यही हमारी प्रार्थना है। ओम शांति।”

