‘राष्ट्र सदैव कृतज्ञ रहेगा’, राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने दी जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों को देश नमन कर रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीदों को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना का एक शक्तिशाली स्मरण है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। इस घटना ने देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार किया था। राष्ट्र उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा। मुझे विश्वास है कि उनकी देशभक्ति की भावना सभी को राष्ट्रसेवा के पथ पर समर्पण और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “आज के दिन हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना का एक सशक्त प्रतीक है। उन्होंने जिस साहस और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “जलियांवाला बाग नरसंहार के सभी अमर बलिदानियों को मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। विदेशी हुकूमत की बर्बरता के खिलाफ उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”

इसके साथ ही, पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया, जिसमें लिखा, “इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्णः॥”

इस ‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “हे कर्मशील मनुष्यों, अपने समाज में उन कल्याणकारी शक्तियों का संवर्धन करो, जो राष्ट्र को समृद्ध, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाती हैं। साथ ही, उन विनाशकारी शक्तियों का दृढ़तापूर्वक प्रतिरोध करो, जो समाज में विभाजन, अन्याय और असंतोष उत्पन्न करती हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जलियांवाला बाग में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानियों को नमन किया। उन्होंने लिखा, “आज ही के दिन पंजाब के जलियांवाला बाग में क्रूर अंग्रेजी हुकूमत का अमानवीय चेहरा बेनकाब हुआ था, जब शांतिपूर्ण सभा कर रहे निहत्थे देशवासियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं। इस जघन्य कृत्य ने पूरे देश को झकझोर दिया और भगत सिंह, ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों के मन में स्वतंत्रता की ज्वाला को और प्रज्वलित किया। यह वह ऐतिहासिक मोड़ था, जहां से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति की भावना को और अधिक बल मिला।”