भारत-चीन ने एससीओ द्विपक्षीय परामर्श का किया आयोजन, आपसी सहयोग जारी रखने पर दिया जोर

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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और चीन ने 16-17 अप्रैल को नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) द्विपक्षीय परामर्श आयोजित किया। भारत के एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयक आलोक ए. डिमरी और चीन के राष्ट्रीय समन्वयक राजदूत यान वेनबिन ने संबंधित प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया।

दोनों पक्षों ने एससीओ नेताओं के फैसलों को लागू करने और संगठन के भविष्य के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्ष एससीओ मामलों में आपसी सहयोग और सलाह-मशविरा जारी रखने और उसे मजबूत करने पर सहमत हुए।

दोनों डेलीगेशन ने मिलकर सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से एसीसीओ फ्रेमवर्क के अंदर सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा करने के लिए मुलाकात की। दोनों पक्ष भविष्य में आपसी सलाह-मशविरा जारी रखने पर सहमत हुए।

सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इससे पहले ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों और क्षेत्रीय व वैश्विक मामलों पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने बताया था कि दुशांबे की अपनी यात्रा के दौरान, सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान के उप विदेश मंत्री इदिबेक कलंदर के साथ मिलकर भारत-ताजिकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श के पांचवें दौर की सह-अध्यक्षता भी की। दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रों जैसे व्यापार और आर्थिक संबंध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को कवर करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया, “सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।”

उन्होंने कहा, “दुशांबे में भारत-ताजिकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श का पांचवां दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और उप विदेश मंत्री इदिबेक कलंदर ने की। उन्होंने वर्तमान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की, जिसमें व्यापार और आर्थिक संबंध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे आपसी हित के क्षेत्र शामिल थे।”