महाराष्ट्र: एक समान एकेडमिक ढांचे के लिए प्रिंसिपलों को अनिवार्य ट्रेनिंग से गुजरना होगा

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मुंबई, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम को लागू करने में तेजी लाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। यह उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव है।

उन्होंने घोषणा की कि राज्य के सभी प्रिंसिपल, निदेशकों और फैकल्टी सदस्यों के लिए ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च कोर्स को प्रभावी ढंग से शुरू करने के लिए तीन दिन का ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य किया जाएगा। यह घोषणा उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक चर्चा सत्र में की गई।

मंत्री ने कहा कि यह ट्रेनिंग इसलिए अनिवार्य की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नया एकेडमिक ढांचा सभी कॉलेजों में एक समान रूप से लागू हो और इसे लागू करते समय कोई एकेडमिक या प्रशासनिक दिक्कत न आए।

पाटिल ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा को ज्‍यादा लचीला और ज्‍यादा रिसर्च-उन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के तहत चौथा साल एकेडमिक सत्र 2026–2027 से लागू होगा, जिससे छात्रों के लिए ज्‍यादा उन्नत पढ़ाई के लिए ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च के विकल्प चुनने का रास्ता खुल जाएगा। इस नई व्यवस्था में क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प, और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि शिक्षकों और प्रशासकों को इन बदलावों की स्पष्ट समझ होनी चाहिए, और इसी मकसद से यह विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है। इस कदम का मकसद राज्य के छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली, कौशल-आधारित और रिसर्च-केंद्रित शिक्षा उपलब्ध कराना है। इससे उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि इस कदम से कॉलेजों को ज्‍यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे एकेडमिक सत्र 2026–2027 से होने वाले एक बड़े एकेडमिक बदलाव की तैयारी कर रहे हैं।

चौथे साल में ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च शुरू होने के साथ ही, संस्थानों को अपनी एकेडमिक योजना और प्रशासनिक प्रणालियों, दोनों में पहले से ही जरूरी बदलाव करने होंगे।

उन्होंने कहा कि इस ट्रेनिंग का मकसद कॉलेजों को एक व्यवस्थित तरीके से तैयारी करने में मदद करना और पूरे राज्य में इसके असमान रूप से लागू होने से रोकना है।

मंत्री ने यह भी कहा कि यह नया ढांचा छात्रों को अंडरग्रेजुएट स्तर पर एक व्यापक एकेडमिक मार्ग प्रदान करता है। अंतिम वर्ष में गहन अध्ययन और रिसर्च के लिए जगह बनाकर, इस सिस्टम से उन छात्रों को बेहतर अकादमिक प्रगति मिलने की उम्मीद है जो आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।

इसे राज्य के उच्च शिक्षा सिस्टम में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया एक अहम फैसला माना जा रहा है, क्योंकि कॉलेज सुधार के अगले चरण की ओर बढ़ रहे हैं।

मंत्री के मुताबिक, यह ट्रेनिंग संस्थानों को नई जरूरतों को व्यावहारिक रूप से समझने और उसी के हिसाब से अपनी टीचिंग और प्रशासनिक टीमों को तैयार करने में मदद करेगी। इस बात पर खास जोर दिया जाएगा कि नए अकादमिक वर्ष की शुरुआत से पहले कॉलेज पूरी तरह तैयार हों और यह बदलाव एक साफ़ और व्यवस्थित तरीके से हो।