नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल की व्यस्त और अनियमित दिनचर्या लिवर की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन गई है। बाहर का तला-भुना खाना, अनियमित खान-पान, तनाव और लापरवाही लिवर को नुकसान पहुंचाती है। लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है। आयुर्वेद में नीम को लिवर के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बताया गया है।
नीम की कड़वाहट भले ही आपको परेशान करे, लेकिन यह लिवर को डिटॉक्स करने और मजबूत बनाने में बेहद प्रभावी है। आयुर्वेद में नीम को ‘अमृत’ कहा जाता है और इसे लिवर के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है। नीम न सिर्फ लिवर को स्वस्थ रखता है, बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाव करता है।
सदियों से आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल होता आ रहा है। नीम की पत्तियां, फूल, टहनी और फल सभी भाग बेहद लाभदायक हैं। नीम की पत्तियां लिवर को डिटॉक्स करने में अचूक हैं। रोजाना नीम की 5-7 पत्तियां चबाने या उनका रस पीने से लिवर में जमा विषैले पदार्थ निकलते हैं। इससे लिवर का कार्य सुचारू रूप से चलता है, पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। थकान और सुस्ती जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।
नीम के अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण धमनियों में जमा गंदगी को साफ करते हैं। इससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है और रक्त संचार बेहतर बनता है। त्वचा की समस्याओं के लिए भी नीम रामबाण है। मुंहासे, दाग-धब्बे और कील-मुंहासों से परेशान लोगों के लिए नीम की पत्तियों का पेस्ट चेहरे पर लगाना या नीम का रस पीना बहुत फायदेमंद है। नीम में मौजूद एजाडिरेक्टिन नामक तत्व बैक्टीरिया को मारता है और त्वचा को साफ-सुथरा रखता है। नीम के पानी से रोजाना चेहरा धोने से त्वचा में निखार आता है।
नीम को अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल किया जा सकता है। नीम की पत्तियों को उबालकर काढ़ा बनाकर पीया जा सकता है। गर्मियों में नीम के फूलों से बना शर्बत या भूजिया भी स्वास्थ्यवर्धक होता है। सुबह खाली पेट नीम का सेवन पूरे शरीर का डिटॉक्स करता है। यह सर्दी, गर्मी और बरसात हर मौसम में फायदेमंद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नीम जैसी जड़ी-बूटियों को अपनाकर हम लिवर को मजबूत बना सकते हैं और कई बीमारियों से बचाव कर सकते हैं। नीम की कड़वाहट भले ही कड़वी लगे, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह मीठा परिणाम देती है। यह सस्ता, सुरक्षित और पूरी तरह प्राकृतिक उपचार है। हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

