असम: बाढ़ से निपटने की तैयारी मजबूत करने के लिए सेना ने ‘एक्सरसाइज जल राहत’ का किया आयोजन

0
6

गुवाहाटी, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। असम में बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय सेना की रेड हॉर्न्स डिवीजन (गजराज कोर) ने शनिवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) गुवाहाटी में संयुक्त राहत अभ्यास ‘एक्सरसाइज जल राहत’ का आयोजन किया।

इस बड़े पैमाने के अभ्यास में सेना के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सहित कई एजेंसियों ने भाग लिया। इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए समन्वित और एकजुट प्रयासों का प्रदर्शन किया गया।

वास्तविक बाढ़ जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किए गए इस अभ्यास में गहरे पानी में रेस्क्यू ऑपरेशन, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रदर्शन किया गया। टीमों ने डूबने की स्थिति में फंसे लोगों को बचाने और प्रभावितों को तुरंत सहायता पहुंचाने की क्षमता दिखाई।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य असम और पूर्वोत्तर में बार-बार आने वाली बाढ़ की स्थिति में बेहतर तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। संयुक्त अभ्यास के जरिए एजेंसियों के बीच तालमेल और तेज कार्रवाई की अहमियत पर जोर दिया गया।

गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने इस अभ्यास की निगरानी की। उन्होंने आपदा प्रबंधन में “पूरे समाज की भागीदारी” की आवश्यकता पर बल देते हुए “अनुमान, तैयारी, सुरक्षा और प्रावधान” के सिद्धांत अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन और लचीलापन बढ़ाने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। इस अभ्यास का उद्देश्य सुरक्षा बलों और आपदा राहत एजेंसियों की तैयारियों के प्रति आम लोगों का भरोसा बढ़ाना भी है।

इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य प्रशासन के प्रतिनिधि, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और आपदा प्रबंधन संगठनों के अधिकारी मौजूद रहे। करीब 800 लोगों, जिनमें एनसीसी और एनएसएस कैडेट्स के साथ गुवाहाटी के स्कूल-कॉलेजों के छात्र शामिल थे, ने इस प्रदर्शन को देखा।

अधिकारियों ने बताया कि सभी भागीदार एजेंसियों ने भविष्य में नियमित संयुक्त अभ्यास, मानक संचालन प्रक्रियाओं को अपडेट करने और क्षमता निर्माण पर निवेश करने का संकल्प लिया है, ताकि आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया जा सके।