अक्षय तृतीया : सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ विजय और अभिजित मुहूर्त, देखें पंचांग

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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि खासा महत्व रखती है। इस दिन को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म का कभी क्षय नहीं होता, इसलिए इसे ‘अक्षय’ कहा जाता है।

इस वर्ष अक्षय तृतीया सोमवार, 20 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य, स्वर्ण या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी और नए कार्य शुरू करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए शुभ कार्यों का फल सौ गुना बढ़ जाता है। इस अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग है, जो किसी भी शुभ कार्य को सिद्ध करने में सहायक होता है। साथ ही अमृत सिद्धि योग भी उपलब्ध है, जो दिन को और अधिक मंगलमय बनाता है। अभिजित मुहूर्त जैसे अत्यंत शुभ समय भी इस दिन मौजूद है, जो पूजा-अर्चना और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभदायी माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा, दान, व्रत और स्वर्ण खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान या घर पर जल से स्नान करने का भी बड़ा पुण्य है। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि और अभिजित मुहूर्त के संयोग से यह दिन नए निवेश, विवाह या अन्य शुभ आरंभ के लिए अत्यंत अनुकूल है।

इस अवसर पर भगवान गणेश, नारायण और कुबेर देव की पूजा करके धन-धान्य और समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व सनातन परंपरा में अनंत कल्याण का प्रतीक है। माना जाता है।

दृक पंचांग के अनुसार सोमवार को सूर्योदय 5 बजकर 51 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 50 मिनट पर होगा। तृतीया तिथि 20 की सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक है, उसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन तृतीया तिथि का ही मान होगा यानी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। नक्षत्र रोहिणी और सौभाग्य योग शाम 4 बजकर 11 मिनट तक व करण गर सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक है।

सोमवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल रात 11 बजकर 16 मिनट से अगले दिन देर रात 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 58 मिनट से देर रात 12 बजकर 42 मिनट यानी 21 अप्रैल तक रहेगा।

यही नहीं सोमवार को अमृत सिद्धि योग देर रात 2 बजकर 8 मिनट से सुबह 5 बजकर 50 मिनट तक है। रवि योग सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 21 अप्रैल की सुबह 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 5 मिनट तक, यमगण्ड सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 46 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।