महिला आरक्षण संशोधन बिल पास न होने से राजस्थान की महिलाएं निराश, दोबारा विचार करने की मांग

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चूरू, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के चूरू जिले की स्थानीय महिलाओं ने महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित न होने पर निराशा व्यक्त की। महिलाओं ने इस बिल पर दोबारा गंभीरता से विचार करने की मांग की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना भी की है।

समाजसेविका रानी कंवर ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जो महिला आरक्षण बिल संसद में लाया गया था, वह पास नहीं हो सका, जिससे महिलाओं में गहरी निराशा है। उनका कहना है कि पहले से ही महिलाएं कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं और ऐसे में यह बिल पास न होना उनके लिए एक झटके जैसा है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं चाहती हैं कि इस मुद्दे पर दोबारा गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं को लेकर चिंता जताई है और माफी भी मांगी, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि इस बिल पर फिर से मंथन हो और इसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए यह एक बड़ा कदम हो सकता था, जिसे सभी राजनीतिक दलों को मिलकर समर्थन देना चाहिए था।

शिक्षिका डॉ. प्रभा पारीख ने इस पूरे घटनाक्रम को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार काफी गंभीर थी और इसे सदन में लाने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। उनका मानना है कि इससे महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है और उनके सशक्तीकरण की दिशा में एक अहम अवसर खो गया है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए ताकि महिलाओं को उनका हक मिल सके।

पूर्व रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने कहा कि भारत में महिलाओं को हमेशा से समाज में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और हमारी परंपरा भी स्त्री सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही थी, लेकिन कुछ राजनीतिक कारणों से यह बिल पास नहीं हो सका।

उनका कहना है कि सभी राजनीतिक दलों को अपने-अपने मतभेद छोड़कर महिलाओं के हित में सोचना चाहिए था, क्योंकि देश की आधी आबादी महिलाओं की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो देश और समाज दोनों को फायदा होगा।