नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) अतिरिक्त गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस कदम से सरकार की वह प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है, जिसके तहत वह किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ घरेलू बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।
केंद्र सरकार ने यह निर्णय मौजूदा उत्पादन, स्टॉक की उपलब्धता और कीमतों के रुझानों की व्यापक समीक्षा के बाद लिया है।
रबी 2026 सीजन के दौरान गेहूं की खेती का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह बढ़ोतरी गेहूं की खेती में किसानों के मजबूत भरोसे को दिखाती है, जिसे सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मजबूत खरीद व्यवस्था का सहारा मिला है। साथ ही, यह एक और अच्छी फसल होने की संभावना का भी संकेत देती है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 10 मार्च 2026 को जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं का उत्पादन 1202 एलएमटी अनुमानित है। उत्पादन की संतोषजनक संभावनाओं और स्टॉक की अधिक उपलब्धता को देखते हुए अतिरिक्त निर्यात की अनुमति देना उचित समझा गया।
इससे पहले, डीएफपीडी ने जनवरी 2026 में 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके बाद, फरवरी 2026 में अतिरिक्त 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों और 25 एलएमटी गेहूं के लिए और मंजूरी दी गई। मंजूरियों के इस ताजा दौर के साथ, अब कुल 50 एलएमटी गेहूं और 10 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे दी गई है।
25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) अतिरिक्त गेहूं के निर्यात की अनुमति देने के हालिया फैसले से बाजार में तरलता बढ़ने, स्टॉक का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित होने और आवक के चरम मौसम के दौरान किसानों को कम दाम पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से बचाने की उम्मीद है। इससे घरेलू कीमतों को स्थिर रखने और किसानों की आय को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित रहे।
सरकार कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देते हुए किसानों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन बनाए रखने के लिए संतुलित और समयबद्ध उपाय अपनाने के प्रति प्रतिबद्ध है।

