धनबाद में भू-धंसान: कतरास की टंडाबाड़ी बस्ती में 20 घर जमीन में समाए, एनएच-32 जाम

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धनबाद, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। कोयलांचल धनबाद का कतरास इलाका गुरुवार देर रात भू-धंसान की भीषण घटना से दहल उठा। सोनारडीह ओपी अंतर्गत टंडाबाड़ी बस्ती में अचानक तेज धमाके के साथ जमीन धंस गई, जिससे लगभग 20 घर 10 से 20 फीट गहरे गड्ढे में समा गए।

घटना के दौरान सूरज राम के परिवार के कई सदस्य मलबे में दब गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों में से एक की हालत गंभीर बताई गई है, जिसे बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का स्थानीय स्तर पर उपचार किया गया। कोयले के अनियंत्रित खनन के कारण यह इलाका पहले से ही संवेदनशील और खतरनाक घोषित किया जा चुका है।

गुरुवार देर रात अधिकांश लोग जब अपने घरों में सो रहे थे या सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी जोरदार धमाके के साथ जमीन धंसने लगी। इस घटना में पूर्व प्रमुख मीनाक्षी रानी गुड़िया का आवास समेत कई मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। लोग किसी तरह घरों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, जबकि एक घर में खड़ी कार भी जमीन में समा गई।

घटना के बाद विस्थापित परिवारों का आक्रोश बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) प्रबंधन और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने सुरक्षा और न्यायोचित पुनर्वास की मांग को लेकर एनएच-32 को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीसीसीएल की अनदेखी के कारण दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती की गई है।

प्रशासन द्वारा लोगों को समझाने और यातायात बहाल कराने का प्रयास जारी है, लेकिन प्रभावित परिवार सुरक्षित पुनर्वास और मुआवजे के लिखित आश्वासन पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार सुबह तक एनएच-32 पर जाम जारी रहा और पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

इधर, केंदुआडीह क्षेत्र में पूर्व में हुए भू-धंसान के कारण धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग बंद किए जाने के विरोध में धनबाद के विधायक राज सिन्हा गुरुवार को बेमियादी धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण मार्ग पिछले नौ दिनों से बंद है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विधायक ने जिला प्रशासन, नगर निगम और बीसीसीएल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं की गई है।

–आईएएनएस

एसएनसी/एएस