बंगाल मतगणना पर टीएमसी को हाईकोर्ट से लगा झटका, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर रोक से इनकार

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कोलकाता, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना प्रक्रिया को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मतगणना केंद्रों पर केवल केंद्र सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट के रूप में तैनात करने का निर्देश दिया गया है।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने दिन में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और शाम को अपना आदेश सुनाते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ”काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से किसे किया जाए, यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। राज्य सरकार के कर्मचारियों के बजाय केंद्र सरकार या केंद्रीय पीएसयू कर्मचारियों की नियुक्ति में अदालत को कोई अवैधता नहीं दिखती।”

अदालत ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी निर्देश मतगणना प्रक्रिया में ”पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यवस्थित संचालन” सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए थे और यह चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है।

बता दें कि टीएमसी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी तथा अधिवक्ता बिस्वरूप भट्टाचार्य ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की थीं।

कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग मतगणना केंद्रों पर केवल केंद्रीय कर्मचारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त कर रहा है, जबकि ऐसा फैसला एकतरफा नहीं लिया जा सकता। उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी।

वहीं, अधिवक्ता बिस्वरूप भट्टाचार्य ने अलग याचिका दाखिल कर यह सवाल उठाया था कि मतगणना केंद्रों की संख्या अचानक क्यों घटा दी गई और कई केंद्रों में बदलाव क्यों किया गया।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की अनुमति दी थी। हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका खारिज कर दी गई।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना 4 मई को होगी। इससे पहले मतगणना व्यवस्था को लेकर राज्य में सियासी विवाद तेज हो गया है।