जनजातीय सशक्तिकरण की कुंजी शिक्षा: मोहन भगवत

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मुंबई, 2 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत ने शनिवार को शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन बताया। उन्होंने वनवासियों की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

गेटवे ऑफ इंडिया पर शनिवार को आयोजित कर्मयोगी एकल शिक्षक मेले में 1,800 से अधिक आदिवासी शिक्षकों की सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने एकल सिंगल-टीचर स्कूल मॉडल की सराहना की और शिक्षकों को सच्चे कर्मयोगी, नि:स्वार्थ कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल साक्षरता नहीं, बल्कि आत्मा का जागरण है और गढ़चिरोली और मेलघाट के सुदूर क्षेत्रों में कार्यरत ये शिक्षक न केवल शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि एक सशक्त भारत की नींव रख रहे हैं।

भागवत ने कहा कि इस मेले का मुख्य संदेश वनवासी समुदायों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाना और साथ ही उनकी अनूठी कला, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करना है। किसी राष्ट्र के उत्थान के लिए उसके सबसे दूरस्थ नागरिकों का सशक्त होना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख ने कहा कि स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था द्वारा किया गया कार्य इस बात का प्रमाण है कि सामूहिक सामाजिक इच्छाशक्ति शहरी विकास और ग्रामीण उपेक्षा के बीच की खाई को कैसे पाट सकती है।

मोहन भगवत ने संस्कार मूल्यों और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि आधुनिक शिक्षा आदिवासी परंपराओं की कीमत पर न दी जाए।

उन्होंने बताया कि इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य जागरूकता, कौशल विकास, डेयरी प्रशिक्षण आदि के माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और आदिवासी कला, संगीत और वन आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करना होगा।

मोहन भगवत ने शहरी आबादी से इन जमीनी आंदोलनों का समर्थन करने की अपील की। ​​उन्होंने श्रोताओं को याद दिलाया कि वनवासी भाइयों और बहनों की प्रगति के बिना भारत का पुनरुत्थान अधूरा है।

इस कार्यक्रम ने एकल विद्यालय नेटवर्क के व्यापक विस्तार की घोषणा करने का मंच प्रदान किया। वर्तमान में, यह पहल विदर्भ क्षेत्र में लगभग 1,300 स्कूलों का संचालन कर रही है, जिनमें 30,000 छात्र पढ़ रहे हैं।

नए रोडमैप का उद्देश्य महाराष्ट्र राज्य भर में 5,000 स्कूलों तक विस्तार करना, सुदूर वन और आदिवासी क्षेत्रों में 6,000 शिक्षकों की तैनाती करना और सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए 100,000 से अधिक आदिवासी छात्रों तक पहुंचना है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके शामिल थे।