नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम ने साफ कहा है कि वह क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट खेलना जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी खिलाड़ी का काम खेलना होता है, यह तय करना नहीं कि किस फॉर्मेट को छोड़ना है।
बाबर अपने करियर के ज्यादातर समय में पाकिस्तान टीम के अहम खिलाड़ी रहे हैं। लेकिन हाल के समय में उनका प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा और वह लगातार रन नहीं बना पा रहे थे। इस साल हुए टी20 विश्व कप में भी वह खास प्रभाव नहीं छोड़ सके।
हालांकि, पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में पेशावर ज़ल्मी के कप्तान के तौर पर खिताब जीतने के सफर ने बाबर में नई जान फूंक दी है। उन्होंने 11 मैचों में दो शतक जड़े और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर उभरे। उन्होंने 11 मैचों में 588 रन बनाकर एक रिकॉर्ड की बराबरी भी की।
पीएसएल 2026 का खिताब जीतने के बाद मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबर ने कहा, “मेरा ध्यान तीनों फॉर्मेट पर है। यह तय करना खिलाड़ी का काम नहीं है कि कौन सा फॉर्मेट छोड़ना है, एक खिलाड़ी का काम तो खेलना है। मेरी राय में, हर खिलाड़ी को क्रिकेट के हर फॉर्मेट में खेलना चाहिए। आपको सिर्फ़ व्हाइट बॉल या टी20 पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए। रेड-बॉल क्रिकेट आपको बहुत ज्यादा अनुभव देता है। यह आपको सिखाता है कि पारी को कैसे आगे बढ़ाना है और आपको धैर्य भी देता है।”
उन्होंने आगे कहा, “जब आप चार दिन का क्रिकेट या कोई घरेलू टूर्नामेंट खेलते हैं, तो आपको ‘लंबी’ पारियां खेलने का अनुभव मिलता है। आपको तीनों फॉर्मेट में खेलना चाहिए क्योंकि हर फॉर्मेट दूसरे की मदद करता है। रेड बॉल क्रिकेट आपको टी20 और वनडे में मदद करता है। जब आप टेस्ट मैच खेलते हैं, तो जो धैर्य और मानसिकता आपमें विकसित होती है, वह आपको व्हाइट-बॉल क्रिकेट में काफी फायदा पहुंचाती है।”
अब बाबर को जल्द ही अपनी फॉर्म जारी रखने का मौका मिल सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की टीम बांग्लादेश के खिलाफ उनके घर में दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने वाली है, जो शुक्रवार से शुरू होगी। बाबर ने आखिरी बार टेस्ट क्रिकेट में शतक दिसंबर 2022 में लगाया था। इस साल पीएसएल से पहले उनका प्रदर्शन सीमित ओवरों में भी खास नहीं रहा। उन्होंने इस साल सिर्फ एक अर्धशतक बनाया, जो फरवरी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच में आया था।
अपने खराब फॉर्म पर बाबर ने कहा, “मैं अपने प्रदर्शन से खुश नहीं था, लेकिन बल्लेबाज के लिए ऐसा दौर आना सामान्य है। आपको एक कदम पीछे जाकर अपनी गलतियों को समझना होता है और उन्हें सुधारना होता है। ऐसे समय में साथ और हौसला बहुत जरूरी होता है, जो मुझे मेरे परिवार और दोस्तों से मिला। मैंने अपने कोचों के साथ अपनी कमजोरियों पर बात की और उन पर काम किया। जिंदगी एक रोलरकोस्टर की तरह है, यहां हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते। अच्छे और बुरे अनुभवों से ही सीख मिलती है और यही जिंदगी का तरीका है।”

