Tuesday, May 26, 2026
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रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने पारिस्थितिकी एवं अंतःविषय अध्ययन को बढ़ावा देने हेतु EFSLE के साथ किया महत्वपूर्ण एमओयू

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भोपाल : 2 मई/ रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), भोपाल के मानविकी एवं लिबरल आर्ट्स विभाग ने इकोसोफिकल फाउंडेशन फॉर द स्टडी ऑफ लिटरेचर एंड एनवायरनमेंट (EFSLE) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य साहित्य, पर्यावरण, जेंडर एवं मानवाधिकार जैसे विषयों में अंतःविषय एवं बहुविषयक अध्ययन को सशक्त बनाना तथा सामाजिक-पर्यावरणीय साहित्यिक चेतना को बढ़ावा देना है। समझौता ज्ञापन पर आरएनटीयू से उप कुलसचिव श्री समीर चौधरी और ईएफएसएलई से संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. ऋषिकेश कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर विश्वविद्यालय से डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी और ईएफएसएलई की तरफ से प्रबंध निदेशक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मानविकी एवं लिबरल आर्ट्स संकाय की अधिष्ठाता डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने समकालीन शिक्षा में पर्यावरणीय जागरूकता, नवाचारपूर्ण शैक्षणिक सहयोग तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अकादमिक साझेदारियाँ विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं और उन्हें वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं।

इस अवसर पर डॉ. ऋषिकेश कुमार सिंह ने “इकोक्रिटिसिज्म, इको-पेडागॉजी एंड द कॉन्सेप्ट ऑफ LEGH” विषय पर व्याख्यान देते हुए साहित्य, पारिस्थितिकी, जेंडर और मानवाधिकारों के गहरे अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यिक विमर्श को पर्यावरणीय दृष्टि से समझना और समाज में संवेदनशीलता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने “पर्यावरण चेतना और भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारतीय दार्शनिक परंपरा में निहित प्रकृति-सम्मत दृष्टिकोण, पर्यावरण संरक्षण की सांस्कृतिक विरासत तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

वहीं समीर चौधरी ने बताया कि यह एमओयू संयुक्त शोध परियोजनाओं, अकादमिक आदान-प्रदान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सेमिनारों तथा स्नातक विद्यार्थियों के लिए इको-क्रिटिसिज्म आधारित पाठ्यक्रमों की शुरुआत के नए अवसर प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही कि मानविकी एवं लिबरल आर्ट्स की अधिष्ठाता डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक-पर्यावरणीय साहित्यिक पहलों में योगदान के लिए ईएफएसएलई की केंद्रीय कार्यकारी परिषद का सदस्य नियुक्त किया गया तथा उन्हें लाइफटाइम मेंबरशिप से सम्मानित किया गया।