ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन नेवी की सबमरीन घुसी थी पाकिस्तानी समुद्री इलाके में, नौसेना की ओर से स्ट्राइक होती तो पहली मिसाइल दागने के लिए सबमरीन तैयार थी

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नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की बहादुरी के सैकड़ों किस्से हैं, जो धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। भले ही इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान पर कोई प्रत्यक्ष स्ट्राइक नहीं की, लेकिन उसने ऐसी घेराबंदी की कि पाकिस्तानी नौसेना अपने ही क्षेत्र में सीमित होकर रह गई। भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन सबमरीन फ्लीट ने पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखा।

22 अप्रैल के बाद से भारतीय नौसेना ने अपनी तैनाती बढ़ानी शुरू कर दी थी। नौसेना का कैरियर बैटल ग्रुप आईएनएस विक्रांत को फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट के लिए भेजा गया, जिसके साथ सबमरीन भी तैनात की गईं। नौसेना के अनुसार, भारतीय सबमरीन पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रही थीं।

भारतीय नौसेना ने चार सबमरीन कमांडरों को ऑपरेशन सिंदूर में उनकी वीरता, साहस और निर्णायक कार्रवाई के लिए नौसेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया। इन कमांडिंग अधिकारियों ने अपने दल का नेतृत्व करते हुए दुश्मन की लगातार निगरानी रखी और उच्च जोखिम वाली तैनाती को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, साथ ही किसी भी समय स्ट्राइक के लिए तैयार रहे।

लंबे समय तक भारतीय सबमरीन पाकिस्तानी जलक्षेत्र में भी ऑपरेट करती रहीं। खास बात यह रही कि पाकिस्तानी नौसेना, अपनी लंबी दूरी के समुद्री गश्ती (एलआरएमपी) विमानों और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) निगरानी के बावजूद, एक भी भारतीय सबमरीन का पता नहीं लगा सकी। यह सब सबमरीन कमांडरों की रणनीतिक दक्षता के कारण संभव हुआ, जिन्होंने पूरी पेट्रोलिंग के दौरान दुश्मन के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध सुनिश्चित किया।

नेवी ने अपनी सबमरीन को इस तरह से पोजिशन किया कि अगर ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना का इस्तेमाल किया जाता तो पाकिस्तानी नेवी के हर तरह के एसेट उसके निशाने पर होते। दुश्मन के क्षेत्र में ऑपरेशन के दौरान टॉरपीडो और डेप्थ चार्ज हमलों का खतरा लगातार बना रहा, लेकिन इन खतरों के बावजूद भारतीय सबमरीन अपने मिशन पर डटी रहीं।

पहलगाम हमले के बाद से भारत ने तीनों दिशाओं से पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उरी हमले के बाद सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी और पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी। पाकिस्तान को आशंका थी कि अगला जवाब नौसेना की ओर से आ सकता है, इसलिए भारतीय नौसेना ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप को उसी दृष्टिकोण से फॉरवर्ड डिप्लॉय किया।

इस तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना को अपने हार्बर में ही रहने के लिए मजबूर कर दिया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के मेरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट ‘सी ईगल’ एटीआर-72 ने अरब सागर में भारतीय तैनाती की जानकारी जुटाने के लिए उड़ान भरी, लेकिन वह भारतीय नौसेना के रडार से बच नहीं सका। जैसे ही वह रडार पर दिखाई दिया, आईएनएस विक्रांत से मिग-29के को कॉम्बैट एयर पेट्रोल के लिए लॉन्च किया गया। मिग-29के ने उस विमान को इंटरसेप्ट कर चेतावनी दी और उसे कराची की ओर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।

आईएनएस विक्रांत के कैरियर बैटल ग्रुप में 8 से 10 युद्धपोत शामिल थे। इसके अलावा, पश्चिमी तट पर 7 डेस्ट्रॉयर, 7 स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट और लगभग आधा दर्जन सबमरीन तैनात थीं। कई फास्ट अटैक क्राफ्ट और मिसाइल बोट भी बड़ी संख्या में मौजूद थीं। कुल मिलाकर, 36 से अधिक युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में तैनात थे।

कैरियर बैटल ग्रुप के सभी युद्धपोत, फाइटर एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर आपस में नेटवर्क से जुड़े थे और किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार थे। सामान्यतः यह बैटल ग्रुप 200 से 250 नॉटिकल मील तक के क्षेत्र को सुरक्षित रखने में सक्षम होता है, जो युद्ध के दौरान और बढ़ सकता है।

आईएनएस विक्रांत से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एंटी-शिप ऑपरेशन, एयर डिफेंस, सर्विलांस और सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, पी-8आई जैसे लंबी दूरी के सर्विलांस विमान की निगरानी में दुश्मन की कोई भी गतिविधि छिप नहीं सकती।

वर्तमान में आईएनएस विक्रांत पर मिग-29के फाइटर जेट तैनात हैं, और भविष्य में इसके लिए फ्रांस से 26 राफेल-एम विमान शामिल किए जाएंगे। हेलिकॉप्टर बेड़े में अमेरिका से लिए गए एमएच-60 रोमियो, चेतक और सीकिंग हेलिकॉप्टर शामिल हैं।

खुद की रक्षा के लिए आईएनएस विक्रांत क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है। इसमें 32 ट्यूब वाले दो वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम लगे हैं, जिनसे इजरायल की 64 बराक-8 मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसके अलावा, इसमें चार ऑटोब्रेडा 76 मिमी गन और चार क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी लगे हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने में सक्षम हैं।