गोविंदपुरा : 4 मई / सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र की निदेशिका स्मिता कुमारी ने गुरुवार को आंगनबाड़ी क्रमांक 1146, गोविंदपुरा में एक विशेष कार्यक्रम “हम सुनेंगे साथी” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों की मानसिक समस्याओं को समझना और उनका समाधान ढूंढना था।
गीत-संगीत से रचा गया माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत बालिका जन्म की खुशी में गाए गए ‘सोहर’ और दहेज प्रथा के विरोध में गीतों से हुई। स्मिता कुमारी ने खुद के रचित लिंग-समानता पर आधारित गीत से कार्यक्रम को गति दी। उनका कहना था कि,
“बेटियों के जन्म और उनके अस्तित्व से जुड़े रीति-रिवाजों में व्याप्त भेदभाव को तोड़ना ज़रूरी है, और इसके लिए गीत-संगीत एक अत्यंत प्रभावी थेरेपी है।”
महिलाओं के अस्तित्व पर जोर
स्मिता कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी में अधिकतर महिलाएं और बच्चे ही आते हैं। उनकी मानसिक सेहत पर काम करने से पहले यह जरूरी है कि उन्हें यह एहसास दिलाया जाए कि उनके होने का, उनके अस्तित्व का एक विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा, “जब महिलाएं खुद से प्रेम करना सीखेंगी, तभी वे अपनी मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक स्थिति को भी महत्व दे पाएंगी।”
‘हम सुनेंगे साथी’ थीम के पीछे की वजह
गीत-संगीत से माहौल तैयार करने के बाद, उन महिलाओं की बात सुनी गई, जो अपने मन के किसी दुःख, तकलीफ या भाव को साझा करना चाहती थीं। उनके समाधान ढूंढने में मदद की गई।
स्मिता ने बताया कि आज भी बच्चे, महिलाएं और LGBTQ समुदाय के लोग खुलकर अपनी मानसिक समस्या साझा नहीं कर पाते। कोई उन्हें जल्दी सुनने या समझने की कोशिश नहीं करता। यही कारण है कि कार्यक्रम का थीम “हम सुनेंगे साथी” रखा गया।
खास बात: जन्मदिन पर निःशुल्क परामर्श और केक
स्मिता कुमारी हर साल अपने जन्मदिन के अवसर पर जरूरतमंदों को निःशुल्क परामर्श सेवा देती आ रही हैं। इस बार उन्होंने अपना जन्मदिन इन्हीं महिलाओं और बच्चों के साथ मनाया। आंगनबाड़ी में ही केक काटा गया और सभी ने एक साथ यह खास दिन मनाया। उन्होंने बताया कि अब हर महीने अलग-अलग थीम के साथ आंगनबाड़ियों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सवाल-जवाब और सहभागिता
मानसिक स्वास्थ्य और लिंग-आधारित भेदभाव पर कई सवाल-जवाब हुए। इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी की सहायिका निशा के अलावा करीब 35 महिलाओं और बच्चों ने हिस्सा लिया।


