देश में कृषि क्षेत्र को तेजी से बढ़ाने और वैश्विक बाजार में स्थिति को मजबूत करने के लिए पीयूष गोयल ने की बैठक

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नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष डॉ. एमजे खान के साथ बैठक की और देश के किसानों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने की पहलों पर चर्चा की, साथ ही वैश्विक दक्षिण के विकास को बढ़ावा देने के लक्ष्य के तहत अफ्रीकी देशों के साथ भारत की कृषि विशेषज्ञता को साझा करने पर भी विचार-विमर्श किया।

खान जाने माने भारतीय कृषि विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक हैं। वे कृषि व्यवसाय, कृषि नीतियों और सतत विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी आवाज हैं, जिन्होंने जैविक खेती पर राष्ट्रीय नीति और वैश्विक कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन जैसी पहलों का नेतृत्व किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गोयल ने कहा,”किसानों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने, वैश्विक कृषि बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करने, अफ्रीकी क्षेत्र के साथ सहयोग को गहरा करने और इस क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता को साझा करने की पहलों पर चर्चा की गई।”

उन्होंने आगे कहा, “दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी विचार-विमर्श किया गया।”

कृषि क्षेत्र में भारत-अफ्रीका साझेदारी एक रणनीतिक गठबंधन है जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है। भारत अफ्रीकी देशों को कृषि उत्पादकता, कृषि मशीनीकरण और खाद्य प्रसंस्करण को उन्नत करने में सहयोग करता है ताकि खाद्य आयात पर निर्भरता कम हो सके और पूरे महाद्वीप में टिकाऊ और लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा मिल सके।

भारत ने अफ्रीकी किसानों को मृदा स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और फसल उत्पादन में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं और अपने कृषि विकास से प्राप्त विशेषज्ञता साझा की है। प्रमुख फोकस क्षेत्रों में कम लागत वाली प्रौद्योगिकी समाधान, कृषि मशीनीकरण (ट्रैक्टर) और उन्नत बीज किस्में शामिल हैं।

भारत ने अंगोला और लेसोथो जैसे देशों को कृषि मशीनरी के लिए ऋण लाइनें (एलओसी) भी प्रदान की हैं और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि-व्यवसाय निवेशों का समर्थन करता है।

इस सहयोग का उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। यह साझेदारी वैश्विक दक्षिण में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की कुंजी है।

इसके अलावा, भारत अफ्रीकी देशों को हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय बिजली कंपनियां ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण पर अफ्रीकी समकक्षों के साथ अनुभव साझा करना शुरू कर चुकी हैं। उदाहरण के लिए, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अफ्रीका50 और अन्य अफ्रीकी संस्थानों के साथ मिलकर ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम किया है, जिससे विभिन्न देशों में सौर और पवन ऊर्जा को एकीकृत करने और जीवाश्म ईंधन संयंत्रों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।