ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य क्षमता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक स्पष्टता का उदाहरण : रिपोर्ट

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नई दिल्ली/कोलंबो, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान को उसकी जमीन पर पटखनी देने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल हो गए हैं। एक ऐसा अभियान जिसने भारत के आतंकवाद-विरोधी नीति में आए निर्णायक बदलाव को दर्शाया। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर भारत के सख्त दृष्टिकोण को बखूबी बयां किया।

यह सैन्य अभियान 6 और 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने शुरू किया था। इसका मकसद 2025 पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देना था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर स्थित नौ बड़े आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था।

श्रीलंका गार्डियन में प्रकाशित ए. जतीन्द्र की रिपोर्ट “वन ईयर ऑफ्टर ऑपरेशन सिंदूर: इंडियाज डॉक्टरीन ऑफ रिसॉल्व” में कहा गया कि यह अभियान सैन्य सटीकता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक स्पष्टता का उदाहरण था। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय रुख को लेकर वैश्विक धारणा भी बदली और यह संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भारत अब अधिक कठोर कार्रवाई के लिए तैयार है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर का महत्व केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की नई सुरक्षा नीति का व्यापक संदेश भी देता है। इसमें कहा गया कि “शांति बनाए रखने के लिए शक्ति और दूरदृष्टि दोनों आवश्यक हैं” और इसी संतुलन में भारत की नई सुरक्षा नीति की दिशा दिखाई देती है।

रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय की ओर से जयपुर में आयोजित संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन के दौरान जारी 28 मिनट की डॉक्यूमेंट्री का भी उल्लेख किया गया। इसमें ऑपरेशन सिंदूर को “दंडात्मक और लक्षित अभियान” बताया गया, जिसका उद्देश्य नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के भीतर आतंकी ढांचे को नष्ट करना था। डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, अभियान में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत “हर आतंकवादी और उसके समर्थकों की पहचान करेगा, उनका पीछा करेगा और उन्हें सजा देगा।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि भारत पर भविष्य में होने वाले किसी भी हमले का जवाब भारत अपनी शर्तों पर देगा।

रिपोर्ट में भारतीय सेना के उप-थल सेना प्रमुख राजीव घई के बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “यह मिशन अंत नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के निरंतर अभियान की शुरुआत है।”

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले से जुड़ी थी। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन बताया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इस समूह को पाकिस्तान सेना और इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस का पूरा समर्थन प्राप्त था।

रिपोर्ट में पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के उस बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हम हर तरह से हिंदुओं से अलग हैं” और कश्मीर को पाकिस्तान की “शाह रग” बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, इन बयानों के कुछ ही दिनों बाद पहलगाम हमला हुआ, जिसमें आतंकवादियों ने धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया और गैर-मुस्लिमों की पहचान के लिए कलमा पढ़ने को कहा। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू चालक मारे गए थे।

इसके जवाब में भारत ने 6-7 मई को “फोकस्ड, मापी गई और गैर-उत्तेजक” सैन्य कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह अभियान 1971 के युद्ध के बाद भारत का सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियान रहा।

अमेरिकी सैन्य विश्लेषक जॉन स्पेंसर का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट हमले शामिल थे, भारत की वायु रक्षा प्रणालियों ने प्रभावी रूप से विफल कर दिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (आईएसीसीसीएस) और ‘आकाशतीर’ प्रणाली का उपयोग किया और रणनीतिक रूप से बढ़त हासिल की।

रिपोर्ट में ऑस्ट्रियाई हवाई युद्ध विशेषज्ञ टॉम कूपर के बयान का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के भीतर प्रमुख आतंकी ठिकानों पर सफल हमले किए, पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को विफल किया और उसके एयर डिफेंस तथा एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया। उनके अनुसार, “नई दिल्ली ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत पाकिस्तान में कहीं भी हमला कर सकता है और पाकिस्तान उसे रोक नहीं सकता।”

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सुरक्षा नीति में एक नए सिद्धांत की शुरुआत की है, जिसमें आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “हम परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमने एक नया सामान्य स्थापित किया है।”

रिपोर्ट के अंत में निष्कर्ष निकाला गया कि ऑपरेशन सिंदूर महज एक जवाबी कार्रवाई नहीं था, वरन यह भारत की स्थायी सैन्य बढ़त और नई प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन था। इसमें कहा गया कि अब भारत की रणनीति “संयम” नहीं, बल्कि “तैयार रहकर जवाब देने” पर आधारित है।