इटानगर, 10 मई (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मीन ने देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की इकाई 4 (250 मेगावाट) के सफल संचालन के लिए राज्य के स्वामित्व वाली एनएचपीसी को बधाई दी है।
विद्युत एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधन मंत्रालय का प्रभार वाले उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चौथी इकाई के चालू होने के साथ ही परियोजना की कुल परिचालन क्षमता अब 1,000 मेगावाट तक पहुंच गई है। मीन ने कहा कि यह स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भारत के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
मीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “मैं इस ऐतिहासिक परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, तकनीकी टीमों, श्रमिकों, अधिकारियों और सभी हितधारकों के अटूट समर्पण, कड़ी मेहनत और चुनौतियों पर काबू पाने तथा पूर्ण रूप से चालू करने की दिशा में निरंतर प्रगति के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। टीम को 2026 के अंत तक शेष इकाइयों के सुचारू और समय पर चालू होने में निरंतर सफलता की कामना करता हूं।”
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह परिवर्तनकारी परियोजना प्रगति को गति प्रदान करेगी, विकास को मजबूत करेगी और आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि में योगदान देगी।
अरुणाचल प्रदेश विद्युत विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, सुबनसिरी नदी पर स्थित 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना के दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है। परियोजना की आठ इकाइयों में से चार पहले ही चालू हो चुकी हैं।
यह विशाल जलविद्युत परियोजना एनएचपीसी द्वारा असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर सुबनसिरी नदी पर विकसित की जा रही है, जिसकी स्थापित क्षमता 2,000 मेगावाट है और इसमें 250 मेगावाट की आठ इकाइयां शामिल हैं।
एनएचपीसी ने 8 मई से इकाई 4 के संचालन की घोषणा की, जिससे परियोजना की परिचालन क्षमता 1,000 मेगावाट हो गई।
अधिकारी ने कहा, “एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर इस जलविद्युत परियोजना से पूर्वोत्तर क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।”
अधिकारियों ने आगे बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य पर्यावरण-पर्यटन, साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक अनुभवों और स्थायी आजीविका के अवसरों को एकीकृत करना भी है।
बता दें कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विशाल परियोजना के विकास के लिए भारत सरकार से समर्थन मांगा था। उन्होंने पर्यटन, विद्युत, जल शक्ति, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) सहित प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों से तकनीकी सहयोग भी मांगा और इस परिकल्पना को साकार करने के लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण की वकालत की।
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से दीर्घकाल में 2,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे विशेष रूप से स्थानीय युवाओं को लाभ होगा, जबकि मध्यम अवधि में प्रतिवर्ष 1.5 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य है।

