नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। लसोड़ा, जिसे इंडियन चेरी भी कहा जाता है, एक मध्यम आकार का तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती वृक्ष है। यह आमतौर पर 10 से 20 मीटर तक ऊंचा होता है और अपने गोंद जैसे फलों के लिए प्रसिद्ध है, जिसे गांव-कस्बों में लोग सालों से खाते और इस्तेमाल करते आ रहे हैं। यह देखने में भले ही छोटा और साधारण लगे लेकिन स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद है।
लसोड़ा का पेड़ आमतौर पर सूखे और गर्म इलाकों में आसानी से उग जाता है। इसके फल हरे रंग के होते हैं और पकने के बाद हल्के मीठे हो जाते हैं। कच्चे लसोड़े का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अचार बनाने में किया जाता है। कई घरों में इसकी स्वादिष्ट सब्जी भी बनाई जाती है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं।
लसोड़ा सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि शरीर को जरूरी पोषण देने का भी काम करता है। इसके छोटे से फल में पोषक तत्वों का खजाना छिपा हुआ है। इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर को ताकत देने के साथ पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। गांवों में पुराने समय से लोग इसे किसी न किसी रूप में इस्तेमाल करते आए हैं।
लसोड़ा पेट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। जिन लोगों को कब्ज या पाचन की दिक्कत रहती है, उनके लिए यह अच्छा माना जाता है। इसके अलावा यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है। आयुर्वेद में इसके फल, पत्ते और बीज तक का उपयोग किया जाता है। कई जगहों पर इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है।
आयुर्वेद में भले ही लसोड़ा के सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है लेकिन औषधि के रूप में इसका इस्तेमाल करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेनी बहुत जरूरी है।

