नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि हरित ऊर्जा से लेकर डेटा सेंटर तक, अदाणी ग्रुप उस मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है जिस पर भारत का डिजिटल और स्वच्छ भविष्य खड़ा होगा।
‘सीआईआई वार्षिक बिजनेस समिट 2026’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात के खावड़ा में अदाणी ग्रुप ने पहले ही दुनिया के सबसे बड़े एकल-साइट नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र का 35 प्रतिशत हिस्सा चालू कर दिया है, जो 30 गीगावाट की परियोजना है और भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने आगे कहा, “ऊर्जा परिवर्तन के लिए हमारी कुल प्रतिबद्धता 100 अरब डॉलर की है, जो हमें दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा निवेशकों में शामिल करती है।”
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर भविष्य की दूसरी बड़ी नींव हैं और अदाणी ग्रुप देश भर में बड़े स्तर पर एकीकृत डेटा सेंटर कैंपस बना रहा है।
अरबपति उद्योगपति ने कहा, “अदाणी ग्रुप गूगल के साथ मिलकर विशाखापट्टनम में देश का सबसे बड़ा गीगावाट स्तर का डेटा सेंटर कैंपस बना रहा है। यह भारतीय जमीन पर डिजिटल क्षमता तैयार करने की दिशा में अरबों डॉलर का निवेश है।”
उन्होंने यह भी बताया कि माइक्रोसॉफ्ट भी अदाणी ग्रुप के डेटा सेंटर मिशन में मजबूत साझेदार है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट और उबर जैसी कंपनियां भी अपनी डेटा जरूरतों के लिए अदाणी ग्रुप के साथ काम कर रही हैं।
गौतम अदाणी ने कहा कि हाल ही में आयोजित एआई समिट में ग्रुप ने डेटा सेंटर कारोबार में भी 100 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि हमारा इरादा है। भारत को अपने डिजिटल भविष्य के लिए दूसरे देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। भारत को खुद अपनी जमीन पर इसे बनाना, चलाना और उसका मालिक बनना होगा।”
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने आगे कहा कि एआई का दौर सिर्फ सर्वर, चिप और एल्गोरिदम से नहीं बनेगा, बल्कि इसे इलेक्ट्रिशियन, तकनीशियन, ऑपरेटर, सुरक्षा अधिकारी, इंजीनियर और लाखों भारतीय युवा आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने बताया कि अदाणी फाउंडेशन के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामुदायिक विकास के लिए 60,000 करोड़ रुपए की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की गई है। इसमें एआई-आधारित स्किलिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
गौतम अदाणी ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन ऐसी जगहों पर निर्माण करने में बिताया है, जहां पहले कुछ भी मौजूद नहीं था।
उन्होंने कहा, “जहां सिर्फ दलदल था वहां बंदरगाह बनाए, जहां अंधेरा था वहां बिजली पहुंचाई और जहां लोग असंभव देखते थे वहां इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया। मैंने एक बात सीखी है — भविष्य अपने आप नहीं आता, उसे बनाना पड़ता है। इसलिए आइए, मिलकर भविष्य बनाएं।”

